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जानिए कैसे रामायण की शबरी से जुड़ा है सबरीमाला का इतिहास ?

Hindutva 2019-01-05 16:58:33

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Sabarimala Temple

भारत देश में ऐसे बहुत से मंदिर हैं जो विश्व प्रसिद्ध हैं. इन्हीं मंदिरों में से एक केरल का सबरीमाला का मंदिर है जो विश्व प्रसिद्ध मंदिर है. सबरीमाला मंदिर में हर दिन लाखों लोग दर्शन करने के लिए आते हैं. यहां हर साल करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं. ये मंदिर पथानामथिट्टा जिले में पूर्व की ओर सबरी हिल्स में स्थित है. सबरीमाला मंदिर पुरे साल खुला नहीं रहता. इस मंदिर में बहुत से नियमों का पालन किया जाता है. साथ इस मंदिर में साफ़ – सफाई का भी बहुत ध्यान रखा जाता है.

केरल में इस मंदिर का बहुत महत्व है. सबरीमाला मंदिर तब अचानक चर्चा में आ गया जब इस मंदिर में महिलाओं ने प्रवेश किया था. इनके प्रवेश का मामला सुप्रीम कोर्ट में है और इसे संविधान पीठ को ट्रांसफर कर दिया गया है. सबरीमाला मंदिर प्रबंधन ने उच्चतम न्यायालय को बताया था कि 10 से 50 वर्ष की आयु तक की महिलाओं का प्रवेश इस मंदिर में बंद है. इस वर्ष तक की महिलाएं मंदिर में नहीं आ सकती क्योंकि मासिक धर्म के समय वे शुद्धता बनाए नहीं रख सकतीं और इस बात को लेकर अब बराबरी की मांग की आवाजें भी उठ रही हैं.

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सबरीमाला मंदिर का इतिहास

Sabarimala Temple अठारह पहाड़ी पर स्थित है, ये मंदिर भगवान अय्यप्पा को समर्पित है. ये मंदिर साल भर खुला नहीं रहता है. साथ ही भगवान अयप्पा को ब्रह्मचारी और तपस्वी माने जाते हैं. मान्यताओं के अनुसार भगवान अय्यपा शिव एवं विष्णु की सन्तान है. मलयालम पंचाग के अनुसार ये मंदिर प्रति माह के पहले पांच दिनों तक ही खुला रहता हैं. Sabarimala Temple मंडला पूजा के लिए ही खुलता हैं और इसके बाद सबरीमाला मंदिर खास पूजा व फेस्टिवल पर भी खुला रहता है.

बता दें कि मंडला पूजा के दौरान सबरीमाला में कई हजार भक्तजन एकत्र होते है. ऐसा कहा जाता है कि मकर संक्रांति के दिन कतामाला पर्वत पर एक दिव्य प्रकाश ज्योति प्रज्जवलित हुई थी तभी से ये स्थान पवित्र सबरीमाला मंदिर के रूप में प्रकट हुआ था. आपकी जानकारी के लिए मकर संक्रांति और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र के संयोग के दिन, पंचमी तिथि और वृश्चिक लग्न के संयोग के समय ही श्री अयप्पन का जन्मदिवस मनाया जाता है. इस मंदिर में प्रमुख उत्सव में होता है अलग उत्साह और रंग यहां दो प्रमुख उत्सव होते हैं. इस उत्सव के बाद श्री अयप्पन का घी से अभिषेक किया जाता है और साथ ही मंत्रों का जोर-जोर से उच्चारण होता है.

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मंदिर के आँगन के एक कोने में सजे-धजे हाथी दिखते हैं तो पूजा के बाद चावल, गुड़ और घी से बना प्रसाद ‘अरावणा’ बांटा जाता है. मान्यता ये भी है कि यहाँ आने वाले हर श्रद्धालूओं को दो महीने मांस-मछली और तामसिक प्रवृत्‍ति वाले खाद्य पदार्थों का त्‍याग करना पड़ता है. ऐसा भी कहा जाता है कि यदि कोई भक्त तुलसी तुलसी या रुद्राक्ष की माला पहनकर व्रत रखता है तो उसकी मुराद पूरी हो जाती है. Sabarimala मंदिर तक जाने वाली सीढ़ियों का काफी महत्‍व है. 5 सीढ़ियां पांच इंद्रियों को दर्शाती हैं और बाकी की 3 काम, क्रोध, लोभ आदि को.

Ayyappa Mandala Pooja Katha Mahatva

सबरीमाला मंदिर में मंडला पूजा में भगवान अय्यप्पा की पूजा का बहुत महत्व माना जाता है. भगवान अय्यप्पा को हरिहर के नाम से भी जाना जाता है. इसका अर्थ भगवान शिव एवं विष्णु का अंश है. पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान हरिहर मोहिनी जो कि विष्णु भगवान का नारी रूप थी की संतान है. पौराणिक कथाओं के मुताबिक एक राजा ने भगवान हरिहर को गोद लिया, लेकिन हरिहर इस बात से नाखुश होकर महल को त्याग दिया. इसी वजह से पूजा के दौरान भगवान हरिहर की रथ यात्रा आज भी निकाली जाती हैं और मकर संक्रांति के दिन सबरीमाला तक लाई जाती हैं.


मंडला अय्यप्पा पूजा विधि

  1. मंडला पूजा में भगवान अय्यप्पा की पूजा की जाती है.
  2. इस पूजा को पूरी सफाई के साथ किया जाता है.
  3. ये पूजा पुरे 41 दिनों तक चलती है.
  4. इस पूजा में सबसे पहले भगवान गणेश का आवाहन किया जाता है.
  5. इन दिनों में पूरी रात भजन कीर्तन भी किए जाते हैं.
  6. साथ ही दक्षिणी सभ्यता के अनुसार सांस्कृतिक उत्सव भी होते.
  7. इस पूजा के दौरान श्रद्धालू तुलसी माला या रुद्राक्ष माला धारण करते हैं जो कि भगवान अय्यप्पा को बहुत प्रिय है.
  8. माला धारण करने के बाद भक्तों को पूरा ध्यान पूजा में लगाना होता है.
  9. इस पूजा में मन की शुद्धता के साथ तन की शुद्धता का भी ध्यान रखा जाता है.
  10. मंडला पूजा में भक्त सुबह उठकर स्नान आदि करके शुद्ध पूजा के वस्त्र धारण करने चाहिए.
  11. नियमित कामों के बाद भगवान अय्यप्पा की पूजा की जाती है.
  12. पूजा में भक्त अपने मस्तक पर चंदन और भभूती का लेप लगाते हैं.
  13. मंडला पूजा के दिनों में भक्त जन सबरी माला मंदिर में दर्शन के लिए जाते हैं. साथ ही कई भक्त मंडला पूजा मकर संक्रांति के दिन तक करते हैं.

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सबरीमाला मंदिर पूजा कथा

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