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यूपी के 10 शहरों में कमिश्नर स्तर के नगर आयुक्त होंगे

Dainik Pukar 2019-01-10 00:00:00

लखनऊ. राज्य सरकार शहरों के विकास को नई गति देने और घूसखोरी रोकने के लिए नया प्रयोग करने जा रही है. प्रयोग के तौर पर प्रदेश के 10 बड़े शहरों अलीगढ़, मेरठ, आगरा, कानपुर, गाजियाबाद, वाराणसी, इलाहाबाद, लखनऊ, मुरादाबाद और बरेली नगर निगमों में कमिश्नर स्तर के आईएएस अधिकारी को नगर आयुक्त बनाने की तैयारी है.
नगर विकास विभाग ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रस्ताव भेज दिया है. उनकी मंजूरी के बाद नियुक्ति विभाग नगर विकास विभाग की सहमति से तैनाती की प्रक्रिया शुरू करेगा.डीएम-वीसी की रुकेगी मनमानीरू नगर विकास विभाग प्रदेश के बड़े शहरों को आधुनिक सुविधाओं वाला बनाना चाहता है. इसीलिए वह पीसीएस के स्थान पर कमिश्नर स्तर के आईएएस अफसर को नगर आयुक्त के पद पर तैनाती देना चाहता है. विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक वरिष्ठ शहरी विकास में नगर आयुक्त की अहम भूमिका होती है. इसके बाद भी डीएम और विकास प्राधिकरण का उपाध्यक्ष आईएएस होने की वजह से पीसीएस नगर आयुक्त इनके सामने अपनी बात नहीं रख पाता है और न ही निर्देश दे पाता है. नगर विकास विभाग इसीलिए चाहता है कि वरिष्ठ आईएएस को नगर आयुक्त बनाया जाए, जिससे विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष और डीएम को शहरी विकास के संबंध में निर्देश दे सके. केंद्र सरकार ने अधिकतर योजनाओं में मंडलायुक्त को अध्यक्ष बनाने का निर्देश दे रखा है. अमूमन होता यह है कि मंडलायुक्त नगर निगमों के कामों में अपेक्षाकृत कम रुचि लेते हैं. इसके चलते विकास संबंधी प्रस्तावों को पास कराने में काफी समय लग जाता है. नगर विकास विभाग का मानना है कि कमिश्नर स्तर का नगर आयुक्त होने के बाद केंद्र सरकार से अनुरोध कर केंद्रीय योजनाओं की कमेटी में उसे ही अध्यक्ष बनवा दिया जाएगा.मुख्यमंत्री स्वयं चाहते हैं कि नगर आयुक्त वरिष्ठ आईएएस अफसर को बनाया जाए, जिससे विकास प्राधिकरणों की मनमानी पर रोक लगे. विकास प्राधिकरणों और नगर निगमों का काम लगभग एक जैसा है. विकास प्राधिकरण के पास नक्शा पास करने और अवैध निर्माण गिराने का भी अधिकार है, लेकिन शहरी लोगों को जाम से निजात दिलाने के लिए अतिक्रतण हटाने का अधिकार नगर निगमों के पास है. सरकार इसीलिए चाहती है कि नगर निगमों को नक्शा पास करने की जिम्मेदारी दे दी जाए, जिससे विकास प्राधिकरणों की मनमानी रोकी जा सके.