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एक्टिविटी ट्रैकर और स्मार्टवॉच से है आपकी प्राइवेसी को खतरा

Gyan Hi Gyan 2019-01-11 22:31:27

एक्टिविटी ट्रैकर और स्मार्टवॉच जैसे डिवाइस आजकल खुद को फिट रखने वाले कई लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं. आप दिन भर में कितना चले, कितनी कैलोरी घटाई जैसी दिनभर की एक्टिविटी की जानकारी रखने वाली ये डिवाइस लोगों को खूब पसंद आ रही है. लेकिन शायद लोग ये नहीं जानते कि अब यही डिवाइस उनकी प्राइवेसी के लिए खतरा बन सकती है.

कैसे हो सकता है प्राइवेसी को खतरा?

दरअसल भारतीय मूल के एक रिसर्चर का कहना है कि इस डिवाइस को बनाने में जिस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल होता है वो आसानी से कस्टमर का हेल्थ डेटा चुराकर एक जगह से दूसरी जगह भेज सकती है. हालांकि इस डिवाइस को बनाने वाली कंपनियां प्राइवेसी का पूरा खयाल रखने का दावा तो करती हैं, लेकिन गारंटी कोई नहीं देता.

रिसर्चर अनिल अश्विनी का दावा है कि एक्टिविटी ट्रैकर और स्मार्टवॉचेज में इस्तेमाल होने वाली AI कस्टमर का डेटा स्टोर कर लेते हैं जिसे हैक किया जा सकता है.

शोधकर्ता के अनुसार इस AI की मदद से यूजर का रोजमर्रा का पैटर्न समझा जा सकता है. फेसबुक जैसी सोशल साइट भी इसी इंटेलिजेंस की मदद से यूजर का हेल्थ डाटा इकट्ठा कर सकती है और फिर इस जानकारी को किसी कंपनी से साझा भी कर सकती है. ये डाटा दूसरी कंपनियों को बेचा जा सकता है. इस तरह से किसी के भी पास आपकी सेहत और आपके रुटीन की अहम जानकारी इकट्ठा हो जाएगी, जो कि बहुत खतरनाक है.

कई कंपनिया खरीदती है हेल्थ डेटा

आजकल कई कंपनियां हैं जो लोगों के हेल्थ डेटा खरीदती हैं. उनका काम लोगों के निजी डेटा से हेल्थ डेटा का मिलान करना होता है और फिर इस डेटा को दूसरी कंपनियों को बेच दिया जाता है.

शोधकर्ता ने आगे कहा कि गलती स्मार्ट डिवाइस की नहीं लेकिन जिस तरह से डेटा इधर-उधर हो रहा है, उसमें प्राइवेसी का हनन कोई बड़ी बात नहीं. अगर आपका हेल्थ केयर डेटा किसी गलत हाथ में लग गया तो काफी बड़ा खतरा हो सकता है. फिलहाल चूंकि डेटा सुरक्षा को लेकर कड़े कानून नहीं है तो ऐसा लगातार हो भी रहा है, लेकिन सेहत जैसी अहम चीज की जानकारी किसी और हाथ में जाना खतरनाक हो सकता है इसलिए डाटा सुरक्षा को लेकर कड़े कानून लागू किए जाने की जरूरत है.