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ये मंदिर है ‘नरक’ का दरवाजा, जो अंदर गया जिंदा नहीं लौटा

Janman TV 2019-01-12 16:00:15


दुनिया रहस्यों से भरी पड़ी है. और वह तमाम रहस्य, जिसे आप और हम रहस्य मानते हैं, केवल तब तक ही रहस्य रह पाते हैं, जब तक कि साइंस की नज़र उनपर नहीं पड़ती. जैसे ही हम किसी रहस्य को साइंस के चश्मे से देखते हैं तो उसके पीछे के लॉजिक समझ में आने लगते हैं और इस तरह रहस्य डीकोड हो जाते हैं.


आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने वाले हैं, जिसे नरक का दरवाजा कहा जाता है. इस मंदिर में जो भी प्रवेश करता है वह जिंदा वापस नहीं लौट पाता. फिर चाहे वह कोई मनुष्य हो या फिर पशु पक्षी. ये मंदिर भारत में नहीं, बल्कि नॉर्थ टर्की के हिरापोलिस शहर में स्थित है. मंदिर का नाम है प्लूटो मंदिर.

यूनानी देवता की जहरभरी सांसें!

यहां पिछले कई सालों से लगातार ऐसी घटनाएं हो रही हैं कि लोग वहां आस-पास जाने में भी भय खाने लगे हैं. लोगों का मानना है कि इस मंदिर के अंदर से एक यूनानी देवता की जहरभरी सांसें लगातार बाहर निकलती हैं और जो भी प्राणी इन सांसों की चपेट में आता है, वह जान से हाथ धो बैठता है.

नरक के मंदिर की हकीकत क्या है?

जैसे ही विज्ञान ने इसे अपने नज़रिये से देखना शुरू किया तो कुछ ही समय में सारे भेद खुल गए. पता चला कि मंदिर के नीचे से लगातार कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकल रही है. और यही गैस पशुओं-पक्षियों और इंसानों की मौत की वजह बनती है.

इस टैंपल के बारे में जर्मनी के डुइसबर्ग-एसेन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर हर्डी पफांज का कहना है कि, ‘यहां हुए अध्ययन से पता चला है कि यहां अत्यधिक मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड है. संभव है कि ये गुफा ऐसी जगह पर हो, जहां पृथ्वी की परत के नीचे से जहरीले गैसें निकल रही हों.’

वैज्ञानिक कहते हैं कि ये जगह पूरी तरह से वाष्प से भरी होने की वजह से काफी धुंधली और घनी है. यही वजह है कि यहां जमीन भी मुश्किल से दिखाई देती है.

जहरीली सांसें और कार्बन डाइऑक्साइड

हालांकि कहने का तरीका अलग-अलग है, लेकिन दोनों बातों में कोई भेद नज़र नहीं आता. पुराने समय में चूंकि कार्बन डाइऑक्साइड को कहने के लिए दूसरे उपयुक्त शब्द नहीं थे तो उसे जहरीली सांसों का नाम दे दिया गया. देवता का नाम इसलिए जोड़ा जाता रहा होगा ताकि वहां जाने से लोग डरें और उस तरफ न जाएं.