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“भारतीय महिलाओं के लिए कार्यबल से बाहर निकलने के लिए पर्याप्त कारण कार्यस्थल पर पूर्वाग्रह”

India Spend 2019-02-09 04:39:58


 

(यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया और सोसाइटी ऑफ वुमन इंजीनियर्स द्वारा 2018 के एक अध्ययन में पाया गया है कि भारतीय इंजीनियरिंग कंपनियों में कार्यरत पुरुष और महिला इंजीनियरों ने कार्यस्थल पर पूर्वाग्रह के समान स्तर का सामना किया है। यह समझने के लिए कि पूर्वाग्रह व्यक्तियों और संगठनों दोनों को कैसे नुकसान पहुंचाता है, और कंपनियां अपने कार्यस्थल को कैसे सुव्यवस्थित कर सकती हैं, हमने अध्ययन के मुख्य लेखक जोन विलियम्स से बात की है। )

 

माउंट आबू: भारत के इंजीनियरिंग कार्यस्थल में पूर्वाग्रह की जांच के लिए 2018 में किए गए एक अध्ययन के अनुसार इंजीनियरिंग कंपनियों द्वारा नियोजित कई पुरुषों ने कार्यस्थल पर पूर्वाग्रह का सामना करने की सूचना दी, और इसी क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं ने भी समान स्थिति की सूचना दी थी। महिलाओं ने मुख्य रूप से लिंग पर आधारित पूर्वाग्रह की सूचना दी, जबकि पुरुषों ने पूर्वाग्रह की रिपोर्ट मुख्य रूप से इस आधार पर की कि वे कहां से आए हैं यानी उनका क्षेत्र और उनकी भाषा दोनों को लेकर। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में लॉ प्रोफेसर, हेस्टिंग्स फाउंडेशन चेयर, सेंटर फॉर वर्कलाइफ लॉ के संस्थापक निदेशक और अध्ययन की प्रमुख लेखक, जोन विलियम्स ने इंडियास्पेंड से बात करते हुए बताया कि “हम यह जानकर हैरान थे कि इंजीनियरिंग क्षेत्र में काम करने वाली महिलाएं और पुरुष कार्यस्थल पर समान रूप से पक्षपात का सामना कर रहे हैं।”

 

उदाहरण के लिए, भारत में काम करने वाले चार में से तीन पुरुष और महिला इंजीनियरों ने खुद को बार-बार साबित करने की जरूरत को महसूस किया, जबकि अपने सहयोगियों की तुलना में वे खुद को समान रूप से सक्षम पाते थे।

 

 पांच श्वेत पुरुषों में तीन की तुलना में, संयुक्त राज्य अमेरिका में इंजीनियरिंग फर्मों द्वारा नियोजित महिलाओं की एक समान संख्या ने समान पूर्वाग्रह की सूचना दी है, जैसा कि  2016 में प्रकाशित एक समान अध्ययन में पाया गया,  अध्ययन को ‘सेंटर फॉर वर्कलाइफ लॉ’ और ‘सोसाइटी ऑफ वुमन इंजीनियर्स’ द्वारा आयोजित किया गया था।  इंडियास्पेंड के साथ बातचीत में, विलियम्स ने बताया कि क्यों कार्यस्थल पर पूर्वाग्रह महिलाओं के लिए कार्यबल से बाहर निकलने का कारण हो सकता है, जैसा कि भारत में बड़े पैमाने पर हो रहा है। अप्रैल-2017 के विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार,  वर्ष 2013 से पहले के दो दशकों में, भारत में महिला श्रम बल की भागीदारी 34.8 फीसदी से गिरकर 27 फीसदी हो गई है।

 

कार्यस्थल पर पूर्वाग्रह या पक्षपात से इंजीनियरिंग कंपनियां अपने सक्षम कर्मचारियों (पुरुष हो या महिला) को खो सकती हैं।  विलियम्स ने कंपनियों को अधिक समावेशी बनाने में मदद करने के लिए एक रूपरेखा तैयार की है। 

 

कार्यस्थल पूर्वाग्रह का अध्ययन करने के लिए आपको किस चीज ने प्रेरित किया? क्या कार्यस्थल पूर्वाग्रह महिलाओं को कार्यबल से बाहर रखता है? क्या लिंग पूर्वाग्रह कम होने की उम्मीद है, अगर इंजीनियरिंग कंपनियों के शीर्ष पर पुरुष स्वयं लिंग तटस्थ नहीं हो तो?

 

 मैंने 1980 के दशक में कार्यबल में प्रवेश किया। लगभग एक दशक पहले, मुझे महसूस हुआ कि कार्यस्थल पर थोड़ा बदलाव हुआ है। जिन महिलाओं के साथ मैं बातचीत कर रही थी, वे उसी तरह के पक्षपात का सामना कर रही थीं, जैसा मैंने 1980 के दशक में किया था। मिसाल के तौर पर, महिलाओं से अभी भी एक निश्चित व्यवहार पैटर्न के अनुरूप होने की उम्मीद की जा रही थी। आमतौर पर, महिलाओं से विनम्र, आत्म-खुश और कम महत्वाकांक्षी होने की उम्मीद की जाती हैं। महिलाएं जो अति महत्वकांक्षी होती हैं, उन्हें अप्रिय ढंग से देखा जा सकता है। जो महिलाएं मुखर होती हैं उनमें व्यक्तित्व की समस्या देखी जाती है। यदि महिलाओं के बच्चे हैं, तो वे अतिरिक्त रूप से मातृ दीवार पूर्वाग्रह का अनुभव कर सकती हैं। 10 इंजीनियरों में से चार ने हमारे कार्यस्थलों में माताओं के खिलाफ पूर्वाग्रह की सूचना दी। महिला साक्षात्कारकर्ता द्वारा की गई इस टिप्पणी पर विचार करें: “मैं कभी भी बात नहीं करती थी, इसलिए मेरे मैनेजर क्रेडिट ले जाते थे। मुझे यह बुरा लगा। लेकिन जब मैंने बोलना शुरू किया, तो इसे चारों ओर धौंस जमाने वाले के रूप में देखा गया। पुरुषों के लिए, कोई संघर्ष नहीं है। जबकि महिलाओं को धौंस जमाने वाले, असभ्य और मुखर रूप में देखा जाता है,  जबकि पुरुषों का इस तरह का व्यवहार लोगों को सहज लगता है। “

 

कार्यस्थल पर कोई भी पूर्वाग्रह पसंद नही आता है। यदि कोई महिला आर्थिक रूप से सहज है, तो इसका अर्थ है कि उसे जीविकोपार्जन के लिए काम नहीं करना पड़ता है, कार्यस्थल पर बहुत अधिक पूर्वाग्रह का अनुभव करने के कारण उसे यह सोचने के लिए प्रेरित किया जा सकता है कि उसकी नौकरी उसके लायक नहीं है।

 

यह चुनौती लैंगिक पूर्वाग्रह को खत्म कर रही है, क्योंकि यह व्यापक है। यह एक सांस्कृतिक चीज है। सर्वेक्षण ने पुरुषों और महिलाओं दोनों से पूछा गया कि क्या महिलाओं के लिए काम पर बहस करना अनुचित है, भले ही वह व्यवसाय से संबंधित हो।

 

जवाब देने वालों में 45 फीसदी महिलाओं ने हां कहा, जबकि केवल 28 फीसदी पुरुषों ने हां कहा। अनिवार्य रूप से, केवल शीर्ष पर पुरुष ही इस तरह से महसूस नहीं करते हैं, कई पुरुष सहकर्मी भी ऐसा महसूस करते हैं।

 
आप कहती हैं कि आप भारत में अनुचित पक्षपात का सामना करने वाले पुरुषों की संख्या को देखकर हैरान थीं। क्या पूर्वाग्रह का यह उच्च स्तर साक्षात्कारकर्ताओं के बारे में कुछ कहता है? क्या यह प्रणाली में विश्वास की कमी को दर्शाता है? क्या प्रतिभागियों की प्रतिक्रियाएं अतिरंजित हो सकती हैं?

 

 

सामाजिक वैज्ञानिक, प्रायोगिक अध्ययनों के माध्यम से 40 वर्षों से अधिक पूर्वाग्रह का दस्तावेजीकरण किया जा रहा है, जो पूर्वाग्रह के उद्देश्यपूर्ण उपायों का उपयोग करते हैं।

 

यह नवीनतम अध्ययन उस प्रयोगात्मक अनुसंधान आधार पर एक सर्वेक्षण के साथ बनाया गया है, जो प्रतिभागियों की धारणाओं पर आधारित है। प्रायोगिक अध्ययन में कई चीजें शामिल हैं। जैसे कि मान लीजिए, एक रिक्त पद- दो समान रिज्यूमे, एक पुरुष और एक महिला और उम्मीदवार कितने सक्षम दिखाई देते हैं, इस आधार पर रेक्रूटर को उम्मीदवार चुनने के लिए कहना। या रेक्रूटर या एक ही लिंग के दो लोगों के दो रिज्यूमे देना, लेकिन वे विभिन्न क्षेत्रों से आते हैं।  प्रायोगिक अध्ययन आमतौर पर मनोविज्ञान प्रयोगशालाओं में सावधानीपूर्वक किया जाता है।हमारे धारणा-आधारित अध्ययन में, हमने उन्हीं पूर्वाग्रहों का दस्तावेजीकरण किया, जो शोधकर्ताओं ने अपने प्रायोगिक अध्ययन में किए थे।इसलिए, ऐसा नहीं है कि हमारे द्वारा साक्षात्कार किए गए पुरुष और महिलाएं अपने कार्यस्थल की स्थिति के बारे में भ्रमित हैं। हमने जिन इंजीनियरों का साक्षात्कार लिया है, यदि उन्होंने उच्च कार्यस्थल पूर्वाग्रह की सूचना दी है तो यह उनके कार्यस्थलों को सुव्यवस्थित क्रम में लाने के लिए इंजीनियरिंग कंपनियों के लिए एक संकेत है। 

 

लोग पक्षपात के बारे में बताते हैं। कंपनियां जो उन व्यक्तियों को रोजगार देती हैं, कार्यस्थल पर पक्षपात की अभिव्यक्ति के लिए किसी भी तरह से वे पीड़ित होते हैं? 

 

हमने जिन इंजीनियरों से बातचीत की, उनमें से तीन-चौथाई ने अपने सहयोगियों के बराबर सक्षम दिखाने के लिए खुद को बार-बार साबित करने की जरूरत महसूस की थी या  एक निश्चित तरीके से व्यवहार करने की आवश्यकता को उन्होंने महसूस किया था। हावी होने वाले समूह के विपरीत वे असाइनमेंट में पूर्वाग्रह, पदोन्नति में पूर्वाग्रह, मुआवजे में पूर्वाग्रह या प्रायोजन और सलाह कार्यक्रमों में पूर्वाग्रह का अनुभव करते हैं। कार्यस्थल पर किसी भी तरह के पूर्वाग्रह का सामना कर रहे चार में से तीन लोगों की सूचना स्वीकार्य नहीं है। दरअसल, कोई पूर्वाग्रह स्वीकार्य नहीं है। आदर्श स्थिति एक निष्पक्ष, पूर्वाग्रह मुक्त कार्यस्थल है। कार्यस्थल पर पूर्वाग्रह कर्मचारियों के कुछ समूहों को नुकसान में डालते हैं, और कंपनी को भी नुकसान होता है। जहां पक्षपात प्रबल होता है, एक निश्चित लिंग के कर्मचारी या एक निश्चित स्थान से या एक निश्चित भाषा बोलने वालों को  काम मिलने की अधिक संभावना होती है। काम और पदोन्नति कई अन्य कारणों पर आधारित होता है। कंपनी के लिए सबसे अच्छा यह है कि वे सबसे अच्छे कर्मचारी को काम पर रखे। अगर ऐसा नहीं होता है, तो निश्चित रूप से कंपनी हार जाती है।

 

हमें उत्तरदाताओं द्वारा कार्य में शामिल किए गए पूर्वाग्रह के स्तरों और काम पर शामिल होने की उनकी भावनाओं के साथ-साथ उनके संगठन में रहने या छोड़ने की इच्छा के बीच एक सीधा संबंध मिला।

 

 उदाहरण के लिए, प्रोव-इट-अगेन बायस और टाइट्रोप बायस, दोनों कैरियर की संतुष्टि में कमी, काम के आनंद में कमी और कहीं और नई नौकरी की तलाश में वृद्धि से जुड़े हुए हैं। कार्यस्थल पर पूर्वाग्रह कर्मचारी टर्नओवर को ट्रिगर करता है, जो काम पर रखने, प्रशिक्षण आदि का खर्च बढ़ाता है।

 

क्या किसी तरह के प्रशिक्षण के माध्यम से पूर्वाग्रह या अभिव्यक्त पूर्वाग्रह की समस्या को हल किया जा सकता है? कार्यस्थल पर पूर्वाग्रह को भले ही खत्म नहीं किया जा सके,पर क्या कम करने में मदद मिल सकती है?

 

साक्ष्य से पता चलता है कि एक बार की विविधता वाली ट्रेनिंग अक्सर काम नहीं करती है। सामाजिक विज्ञान में पूर्वाग्रह की जड़ें हैं। इसलिए, लिंग पूर्वाग्रह को समाप्त करने के लिए व्यक्तियों और पूरे संगठनों की संस्कृति को बदलना आवश्यक है। आप एकल हस्तक्षेप के माध्यम से संस्कृति को नहीं बदल सकते। शोध से पता चला है कि पूर्वाग्रह अवरोधक पूरे संगठन में व्यवस्थागत बदलाव लाने का एक प्रभावी तरीका है। इसके लिए सबसे पहले यह पता लगाने के लिए सर्वेक्षणों का उपयोग करना जरूरी है कि क्या आपके कार्यस्थल में पूर्वाग्रह पैटर्न मौजूद हैं और वे रोजमर्रा के काम के इंटरैक्शन को कैसे प्रभावित कर रहे हैं। इसके बाद, बेसलाइन स्थापित करने के लिए एक उद्देश्य मीट्रिक विकसित करना है। उदाहरण के लिए, क्या आपकी कंपनी में प्रदर्शन मूल्यांकन महिलाओं की तुलना में पुरुषों के लिए लगातार उच्च रेटिंग दिखाते हैं? यदि जवाब हां है, तो पूर्वाग्रह अवरोधक को लागू करें, जैसा कि पर्फॉर्मेंस इवैल्यूशन रेटिंग्स सुनिश्चित करना कर्मचारी के प्रदर्शन रिकॉर्ड से वस्तुनिष्ठ साक्ष्य द्वारा समर्थित हैं। बायस इंटरप्रेटर लगाने के बाद,  सफलता का आकलन करने के लिए अपने मीट्रिक पर लौटें- और कुछ और प्रयास करें यदि आप अभी तक अपने लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाए हैं। एयरबीएनबी पूर्वाग्रह अवरोधकों को सफलतापूर्वक लागू कर रहा है। 2015 में, एयरबीएनबी ने हायरिंग प्रक्रिया में छोटे समायोजन करके अपनी डेटा साइंस टीम में महिलाओं का प्रतिशत 15 फीसदी से बढ़ाकर 30 फीसदी कर दिया, जिसमें अभ्यर्थियों को दिए गए वस्तुनिष्ठ परीक्षण में रेजुमे का नाम शामिल नहीं था और यह सुनिश्चित किया गया कि इंटरव्यू पैनल के कम से कम आधे सदस्य महिलाएं हों।

 
(बाहरी एक स्वतंत्र लेखक और संपादक हैं और राजस्थान के माउंट आबू में रहती हैं।)
 

यह साक्षात्कार मूलत: अंग्रेजी में 3 फरवरी, 2019 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।