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वरिष्ठ पत्रकार संतोष भारतीय ने बताया, तीन हफ्ते तक क्यों छिपाकर रखनी पड़ती थी खबर

Samachar4Media 2019-02-09 00:00:00

Published At: Saturday, 09 February, 2019 Last Modified: Saturday, 09 February, 2019

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

‘चौथी दुनिया’ के प्रधान संपादक संतोष भारतीय की गिनती देश के शीर्ष पत्रकारों में होती है। उन्होंने हिंदी और अंग्रेजी दोनों तरह की पत्रकारिता की है। ऐसे में संतोष भारतीय के साथ एक खास बातचीत के दौरान समाचार4मीडिया डॉट कॉम के संपादकीय प्रभारी अभिषेक मेहरोत्रा ने जानना चाहा कि वर्तमान में पत्रकारिता की दिशा के बारे में वे क्या सोचते हैं।  

उन्होंने यह भी जानना चाहा कि क्या दोनों तरह की पत्रकारिता के बीच आज भी खाई बनी हुई है या पत्रकारिता की कोई भाषा नहीं होती है  और वह सिर्फ पत्रकारिता होती है? इस पर संतोष भारतीय ने कहा, ‘यह सवाल हर दौर की पत्रकारिता के लिए उपयुक्त है। हमने जब पत्रकारिता की शुरुआत की थी तो उस दौरान हमारे संपादक एसपी सिंह हुआ करते थे, जिनके साथ मैंने अपनी जिंदगी का दो तिहाई हिस्सा पत्रकारिता में गुजारा और उन्हीं से पत्रकारिता सीखी।’

संतोष भारतीय का कहना था, ‘उस समय वरिष्ठ पत्रकार एमजे अकबर संडे में हुआ करते थे। एमजे अकबर की तारीफ मैं इसलिए करूंगा कि पहली बार उन्होंने हिंदी पत्रकारिता की ताकत को समझते हुए हिंदी की रिपोर्ट्स को अंग्रेजी में अनुवादित करके पब्लिश किया। कहने का मतलब है कि हिंदी पत्रकारिता की ताकत को सबसे पहले एमजे अकबर ने पहचाना। इस ताकत ने अपने देश के उस दौर को काफी प्रभावित किया। उस समय संडे के लोकप्रिय होने का एक बड़ा कारण ये भी था कि उसमें हिंदी की रिपोर्ट्स को अंग्रेजी में ट्रासंलेट कर पब्लिश किया जाता था।’

संतोष भारतीय के अनुसार, जब ‘आनंद बाजार पत्रिका’ ने ‘रविवार’ और ‘संडे’ की शुरुआत की तो उस समय एसपी सिंह ने पत्रकारिता में वो धार पैदा की कि ‘संडे’ अखबार ने उन्हीं हिंदी रिपोर्टस को अंग्रेजी में अनुवाद करके पब्लिश किया। उन्होंने मुझसे, उदयन शर्मा से और अरुण जैन की रिपोर्ट्स से इसकी शुरुआत की। उस दौर में हमारा झगड़ा दिनमान अखबार से हुआ करता था। हमारा अखबार तीन हफ्ते के अंतराल के बाद मार्केट में आया करता था। उस दौर में हम अपनी खबर को इतना छिपाकर रखते थे कि किसी विषय पर हमने क्या कहा है, लोग तीन हफ्ते तक भी इसकी प्रतीक्षा करते थे।’

संतोष भारतीय ने इसके साथ यह भी कहा, ‘हम उस दौर के साक्षी हैं, जिस दौर में हिंदी पत्रकारिता ने अपनी धमक अंग्रेजी पत्रकारिता के ऊपर जमाई और आज भी मेरा मानना है कि हिंदी में जितनी अच्छी-अच्छी रिपोर्ट्स होती हैं, अंग्रेजी में उतनी नहीं होती हैं।’

संतोष भारतीय के साथ इस बातचीत के विडियो को आप यहां देख सकते हैं-