newsdog Facebook

Hajj Yatra 7 Rituals: मुस्लिम क्यों मारते हैं शैतान पर पत्थर?

Gyan Hi Gyan 2019-05-13 00:02:24

हर सच्चे मुसलमान के लिए इस्लाम के 5 स्तंभों को मानना जरूरी होता है। इमान, नमाज, रमजान, जकात और हज। ये वो 5 चीजें हैं जो हर मुसलमान के लिए फर्ज है। ऐसे ही हज यात्रा भी इस्लाम के 5 स्तंभों में से एक है। इस्लाम के मुताबिक हर मुस्लिम का ये कर्तव्य है कि वो अपने जीवन मे कम से कम एक बार पवित्र मक्का की यात्रा जरूर करें। इसमें जो लोग शारीरिक या फिर आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हैं कुरान में उन्हीं के लिए छूट दी गई है।

कब होती है हज यात्रा

इस्लामी कैलेंडर के मुताबिक हज यात्रा आखरी महीने की 8वीं से 12वीं तारीख तक होती है। क्योंकि इस्लामी कैलंडर के दिन अंग्रेजी कैलंडर की तुलना में हर साल 10 या 11 कम होते है इसलिए इसकी तारीख बदलती रहती है। इस साल 9 से 14 अगस्त को हज यात्रा होगी।

हज के पढ़ाव

इहराम

हज के लिए यात्री खास तरह के कपड़े पहनते है जिन्हें इहराम कहते हैं। पुरुष 2 टुकड़ों वाला एक बिना सिलाई का सफेद चोगा पहनते हैं। वहीं महिलाएं भी सेफद रंग के खुले कपड़े पहनती हैं जिनमें बस उनके हाथ और चेहरा ही बिना ढका हुआ रहता है।

तवाफ

सारे यात्री मस्जिद अल-हरम, जिसमें काबा है, वहां पर जाते हैं और काबा के सात चक्कर लेते हैं। इसे तवाफ कहा जाता है।

सई

तवाफ के बाद यात्री काबा के पास स्थित दो पहाड़ियों सफा और मारवाह के बीच में आगे और पीछे चलते हैं। जिसे सई कहते हैं। तवाफ और सई की रस्म को उमरा कहा जाता है और इसके बाद ही हज की असली रस्में शुरू होती हैं।

पहला दिन

उमरा के बाद अगली सुबह की नमाज पढ़ने के बाद मक्का से 5 किलोमीटर की दूरी पर बनी जगह मीना पर यात्री पहुंचते है जहां पर वो बाकी का सारा दिन गुजारते हैं। यहां वो दिन की बाकी की चार नमाजें पढ़ते है।

दूसरा दिन

अराफात

दूसरे दिन यात्री मीना से 10 किलोमीटर दूर अराफात की पहाड़ी पर पहुंचते हैं और नमाज अदा करते है। अराफात की पहाड़ियों पर दोपहर का समय बिताना जरूरी है, नही तो हज अधूरी मानी जाएगी।

मुजदलफा

सूरज छिपने के बाद हाजी अराफात और मीना के बीच में स्थित मुजदलफा जाते हैं। वहां वो आधी रात तक रहते हैं। वहीं पर वो शैतान को मारने के लिए पत्थर जमा करते हैं।