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कब तक सहूंगी मैं अपमान(अंतिम भाग)

MomEspresso Hindi 2019-05-14 17:35:20

कहानी का पहला भाग पढ़ने के लिए इस लिंक को क्लिक कीजिए https://www.momspresso.com/parenting/daastaane-sbhii-kii/article/kaba-taka-sahumgi-maim-apamana

अब तक आपने पढ़ा  की अलका का पति अनिल  बहुत ही गुस्सैल और डोमिनेटिंग नेचर का था अब आगे-

अलका पूरी रात सो ना सकी आंखों ही आंखों में सारी रात कट गई वह यही सोचती रह गई कि मैं अपनी स्थितियों को कैसे बदलूं?

अगले दिन सुबह फिर से वह यंत्रवत घर के कामों में जुट गई अनिल जब सो कर उठा तब उसके लिए चाय भी बना दी वह अनिल से बात करना चाहती थी उसने अनिल के पास जाकर कहा कि आप मुझसे इतनी बुरी तरह क्यों पेश आते हैं क्यों मेरे मां बाप को गालियां देते हैं ऐसा कब तक चलेगा ऐसा करके आप को क्या हासिल होता है? यह सुनते ही अनिल आग बबूला हो उठा और गुस्से में चिल्लाया इधर आ जरा और हाथों से मारने का इशारा करते हुए कहा पास आओ अभी तुम्हें समझाता हूं कि ऐसा कब तक चलेगा? और तुम्हें बहुत दिनों से खुराक   नहीं मिली है ना इसलिए छटपटा रही हो,ये कह कर मारने के लिए अलका की ओर लपका, अलका ने भी अपने बचाव के लिए अपना हाथ आगे किया और ऊंचे स्वर में चिल्लाई अनिल से बोली "अपना हाथ पीछे रखो नहीं तो घरेलू हिंसा का मुकदमा तुम पर कर दूंगी मैं ऐसी जिल्लत की जिंदगी नहीं जीना चाहती" अनिल एक पल को हैरान रह गया कि अलका में इतनी हिम्मत कहां से आई  फिर अलका से बोला  "आसपास के लोग सुनेंगे अपना मुंह बंद रखो नीचे आवाज में बोलो "अलका  ने कहा मुझे अब किसी की परवाह नहीं मुझे किसी झूठी इज्जत की अब कोई परवाह नहीं  मुझे अपनी जिंदगी  अपने तरीके से जीनी हैं ऐसे घुट घुट के जीने से क्या फायदा अनिल भी बौखला गया और अलका को तलाक की धमकी देने लगा कहने लगा कि रुक जा अभी तुझे सबक सिखाता हूं तेरे बाप को फोन लगा कर बोलता हूं कि मुझे तलाक लेना है तब  तेरी अकल ठिकाने आएगी बड़ी रानी लक्ष्मीबाई बनती फिर रही है एक बार समझाया की  औरत का सम्मान उसके पति के चरणों में है पर तुझे समझ में नहीं आता अब तू देख मैं तुझे क्या सजा देता हूं ऐसा कहकर अनिल बिना खाए चला गया।

 जो भी हुआ अलका को दुख भी हुआ और अफसोस भी उसे अब यह चिंता सताने लगी कि अनिल अब उसके पिताजी को फोन करके तलाक के बारे में धमकी देगा और उसके पिता और मां दुख के सागर में डूब जाएंगे यह सोचकर अलका का दिल बैठा जा रहा था और  सोचने लगी क्या मुझे अनिल की बातों को सहन करना था क्या यही औरत की विडंबना है ?कि अपने अधिकारों के लिए मांग करने पर उसे धमकी दी जाती है समाज और दुनियादारी का खौफ दिखाया जाता है और खासकर अपने लोगों की तकलीफ से औरत अपमान सहने को मजबूर हो जाती है?

 अलका ने अपने मायके फोन लगाया और सामान्य बातचीत की अभी तक किसी की बातों से यह जाहिर नहीं हुआ कि अनिल ने उनसे कोई बात की है जैसे हमेशा बातें होती रही वैसे ही हुई थोड़ी देर बात करने के बाद अलका निश्चिंत हो गई कि अनिल ने मायके  मैं इस विषय से संबंधित कोई बात नहीं की और वह थोड़ा रिलैक्स महसूस कर रही थी  उसमें आत्मविश्वास भी  झलक रहा था।


अलका सोच रही थी कैसे अनिल की सोच को वह बदल पाएंगी वह  जान गई थी अनिल को बदलना इतना आसान नहीं है   इसी कशमकश में वह कोई रास्ता ढूंढने लगी जिससे अपने स्वाभिमान को ,अपने अस्तित्व को वो  बना के रख पाए।   क्योंकि अनिल की सोच संकीर्ण मानसिकता की थी जहां पर स्त्रियों को दबाकर रखा जाए और अनिल मैं पुरुष होने का अहंकार भी बहुत   था। अलका अपने आप से ही सवाल किया करती कि मैं कैसे इन स्थितियों को बदल ताकि मैं भी स्वाभिमान से अपनी जिंदगी को गुजार सकूं और अब उसे अपनी बेटी पीहू की भी चिंता सताने लगी ऐसे ही स्थितियों में मैं उसका पालन पोषण कैसे कर पाऊंगी क्योंकि कई बार अनिल के स्वभाव के  कारण वह इतनी  तनावग्रस्त रहती थी कि पीहू  पर भी उतना कंसंट्रेट नहीं कर पाती थी काम सब किया करती थी मगर वह इसी उधेड़बुन में,अपने अस्तित्व को तलाशती रहती थी सोचती थी की महिलाओं की जागरूकता के बारे में बातें करना अलग है लेकिन खुद पर जब गुजरती है तो उस स्थिति का सामना, समाज को मद्देनजर  रखते हुए अपने परिवार को ध्यान में रखते हुए कोई साहसिक कदम उठाना वाकई बड़ी बात होती है आज अलका को यह एहसास हो रहा था। पर अनिल के गुस्सैल स्वभाव को दिन पर दिन बढ़ता देखकर उसे अपने और पीहू के भविष्य  की भी चिंता सताने लगी और उसने निश्चय किया कुछ भी हो मुझे इन स्थितियों को बदलना होगा और यह अब मेरे हाथ में ही है अलका को लगने लगा था उसकी स्थिति की जिम्मेदार कहीं ना कहीं वह खुद भी है उसे अब इस दयनीयता  के चोले को  उतार फेंकना होगा इसके लिए सबसे पहली पहल आत्मनिर्भर बनना होगा।

 आज अनिल जल्दी घर आ गए थे उन्होंने अलका को अपने पास बुलाया और कहां कि मुझे भी अपनी इज्जत प्यारी है मैंने तुम्हारे मां-बाप से कोई बात नहीं की अलका ने भी खुशी जाहिर की और कहा कि आप बुरे नहीं है  आप की सोच ने आपको मुझसे बहुत दूर खड़ा कर दिया है और इस बात से तो मेरे मन में आपके प्रति और सम्मान बढ़ गया है भले ही आप  ने अपनी सामाजिक इज्जत ही सही उसके लिए ही सही पर फिर भी मेरे मां बाप के सामने यह सब ना कह कर मुझे खुशी दी है।

 अनिल ने भी अलका से कहा कि तुम मुझे छोड़ कर जाना चाहती हो तो जाओ पर मैं तुम्हें तलाक नहीं दूंगा। मैं आज दिन भर इसी विषय पर सोचता रहा शायद मैंने तुम्हें अपने इशारों पर चलाने की कोशिश की जो ठीक नहीं।

 अलका के साहसिक रवैये से  अनिल यह समझ चुका था कि अब अलका  के अन्दर किसी बात का  डर नहीं है और वह अब उससे दबकर नहीं रहने वाली।  अनिल को भी अपनी सामाजिक छवि की चिंता थी उसकी समाज मैं एक रेपुटेशन थी ओहदा था जिसे वह भी धूमिल नहीं करना चाहता था अब उसकी भलाई इसी में थी कि वह अलका को स्वतंत्र रूप से जीने की आजादी दे बिना किसी  बाध्यता के।

  अलका ने घर से ही पार्ट टाइम जॉब शुरू कर दिया अलका ऑनलाइन टीचिंग करके थोड़ा बहुत कमाने लग गई थी उसे पीहू को भी समय देना था इसलिए उसे घर से ही जॉब करना ठीक लगा उसने अपनी राह चुन थी वह अपने स्वाभिमान को मार कर नहीं जीना चाहती थी ।अनिल के मन में भी अलका के प्रति स्नेह और सम्मान जागने लगा था आगे स्थितियां बेहतर होती गई और अलका और अनिल का रिश्ता भी पहले से बेहतर हो गया ।

एक दिन अनिल ने अलका से बातों ही बातों में पूछा अगर अलका मैं तुम्हें तलाक दे देता तो तुम क्या करती ?

अलका ने कहा मुझे दुख होता आप से बिछड़ने का और मुझे सामाजिक आर्थिक भावनात्मक परेशानियां उठानी पड़ती,पर इन  परिस्थितियों के बावजूद भी मैंने प्रण कर लिया था कि मैं अब ऐसे माहौल को बर्दाश्त नहीं करूंगी क्योंकि मेरी आत्मा मुझे हमेशा कचोटती  थी और अपने स्वाभिमान के लिए आत्मसम्मान के लिए मैं आपसे अलग रहना ही स्वीकार करती।

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आपकी सहेली

दीपाली