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इस समुद्री तल पर पहुंचे पूर्व नौसेना अधिकारी, कचरा देख हो गए निराश!..

Mykhabar 2019-05-15 08:40:34
आज एक बार फिर मै खान पान से जुडी कुछ जरुरी बातों के साथ ये नयी पोस्ट लेकर आया हूँ, इस पोस्ट को आखिरी तक पढ़ते रहे ..

संयुक्त राज्य अमेरिका के टेक्सस में एक खोजकर्ता ने सबमरीन के जरिए इतनी गहराई में उतरे जहां अभी तक कोई इंसान नहीं पहुंचा था। मगर वहां जाकर उन्होंने जो नजारा देखा उससे वह हैरान रह गए क्योंकि वहां उन्हें कचरा नजर आया। जो दुनिया के किसी भी स्थल पर दिखाई देता है।

दरअसल, इस खोजकर्ता का नाम विक्टर वेस्कोवो है जो सेवानिवृत्त नौसेना अधिकारी है। उन्होंने बताया कि उन्होंने यह खोज धरती के सबसे गहरे स्थान मरियाना ट्रेंच पर की जो प्रशांत महासागर में स्थित है। वह इस स्थल पर 35,853 फीट नीचे उतरे। वेस्कोवो को यहां कई अज्ञात प्रजातियां मिलीं क्योंकि अभी तक यहां कोई इंसान नहीं पहुंचा है।

इतना ही नहीं एक बार में उन्होंने ट्रेंच पर चार घंटे का समय बिताया। जहां उन्होंने अद्भुत समुद्री जीवन देखा जिसमें झींगा जैसे आर्थ्रोपोड्स थे जिनके लंबे पैर और सिर पर एंटीना था। उन्हें यहां समुद्री सुअर भी दिखाई दिया जो समुद्री खीरे जैसे थे। इसके अलावा उन्हें नुकीली धातु, मिठाई के खाली डिब्बे और प्लास्टिक का सामान दिखाई दिया। जिसमें से एक पर कुछ लिखा था।

वहीं, वेस्कोवो ने एक इंटरव्यू में बताया कि ‘महासागर में सबसे गहरे बिंदु पर मानव कचरे को देखना बहुत निराशाजनक था।’ संयुक्त राष्ट्र के अनुसार दुनिया के महासागरों में मौजूद प्लास्टिक अपशिष्ट लगभग 100 मिलियन टन तक पहुंच गया है। वैज्ञानिकों को व्हेल जैसी समुद्री स्तनधारियों के अंदर माइक्रो प्लास्टिक मिला है।

साथ ही वेस्कोवो को आशा है कि मरियाना ट्रेंच पर मिले कचरे की उनकी खोज समुद्रो में फेंके जाने वाले कचरे को लेकर जागरूकता फैलाएगी। इतना ही नहीं सरकार पर मौजूदा नियमों को बेहतर ढंग से लागू करने के लिए दबाव बनाएगी। पिछले तीन हफ्तों के दौरान खोजकर्ता ने अपनी सबमरीन के जरिए मरियाना ट्रेंच के चार गोते लगाए हैं।

बता दें, विक्टर की टीम सबमरीन और मोटर शिप के जरिए पांच बार मरियाना ट्रेंच की निचली सतह पर उतरी। टीम ने दूरदराज के इलाकों का पता लगाने के लिए रोबोटिक लैंडर्स तैनात किए थे। इससे पहले 1960 में अमेरिकी नौसेना के लेफ्टिनेंट डॉन वॉल्श और स्विटजरलैंड के इंजीनियर जैक्स पिककार्ड मरियाना ट्रेंच की निचली सतह तक पहुंचे थे।