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नदियों के किनारे की रेती हवा में घुलकर बढ़ा रही है प्रदूषण, इंसानी सेहत पर असर की हो रही पड़ताल

Hind News 24 2019-05-15 15:42:17

 गंगा और अन्य नदियों के किनारे की रेती हवा में घुलकर प्रदूषण बढ़ा रही है। सुनकर आप चौंकेंगे लेकिन ये बिल्कुल सच है। सूक्ष्म आकार के ये कण वायुमंडल में धरती से 40 किमी ऊंचाई तक मिल रहे हैं। अब केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) आइआइटी कानपुर से इन कणों की जांच करा रहा है कि ये इंसान की सेहत को कितना प्रभावित कर रहे हैं।

पीएम-10 से बड़े कण भी मिले

गंगा, यमुना, पांडु आदि नदियों के किनारे से निकले 60 फीसद कणों का आकार पीएम-10 से अधिक होता है। यह हवा में 100 मीटर की ऊंचाई तक मिलते हैं। यह हवा के साथ गंगा के तट से पांच से छह किमी तक जा सकते हैं। उड़कर जाने से आंखों में किरकिरापन, गले में खराश, छींक आने की समस्या होती है। शहर में निर्माण सामग्री खुले में ले जाने और भवन निर्माण की वजह से भी पीएम-10 कणों का घनत्व अधिक रहता है। इससे महीन कण हवा के जरिए और ज्यादा ऊंचाई तक चले जाते हैं।

मैग्नीफाई कर देखे जा सकते

हवा में कार्बन मोनोऑक्साइड (सीओ), कार्बन डाईऑक्साइड (सीओटू), नाइट्रोजन डाईऑक्साइड (एनओटू), सल्फर डाईऑक्साइड (एसओटू) के अलावा नदियों की रेती के कण भी मिले हैं। ये महीन कण सामान्य तौर पर आंखों से नहीं दिखते हैं। इनके लिए विशेष तरह के एयर सैंपलर की आवश्यकता पड़ती है। उनको मैग्नीफाई करके देखा जाता है।

मेटल्स और सेहत पर प्रभाव की हो रही पड़ताल

नदियों की रेत के नैनो पार्टिकल्स में कई मेटल्स होते हैं। प्रारंभिक जांच में कणों में सिलिका, आयरन, कैल्शियम, जिंक, कॉपर मिले हैं। अभी क्रोमियम, लेड या अन्य हानिकारक मेटल नहीं पाए गए हैं लेकिन यह सेहत पर कितना असर डाल रही है, इसकी जांच कराई जा रही है।

भवनों को नुकसान पहुंचाने की जांच

आइआइटी के सिविल इंजीनियङ्क्षरग विभाग के विशेषज्ञों के मुताबिक कोयला, लकड़ी, खनिज के जलने से निकलने वाली गैसों के साथ ही रेत के अत्याधिक छोटे कण भवनों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। यह अधिकतर टाइल्स, संगमरमर और पत्थरों पर जम जाते हैं। उनके गुण-दोष की जांच की जा रही है।

कानपुर और आगरा में हो रही जांच

यूपीपीसीबी के मुख्य पर्यावरण अधिकारी कुलदीप मिश्र का कहना है कि सीपीसीबी, यूपीपीसीबी और आइआइटी मिलकर कानपुर व आगरा में नदियों के किनारे से उडऩे वाले इन कणों की जांच कर रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि नदियों के किनारे की रेती को उडऩे से नहीं रोका जा सकता है लेकिन वह प्रदूषण के वाहक न बनें, यह इंतजाम कर सकते हैं। इसके लिए नदियों को प्रदूषणमुक्त रखना होगा ताकि किनारों से उडऩे वाली रेत नुकसान नहीं पहुंचाए।

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