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'लालू यादव' के जन्मदिन पर बिहार रहा सूना, मुफलिसी के दौर में संघर्ष कर लालू ने यूं पाया राजनीतिक मुकाम

Patrika 2019-06-11 16:53:52

(पटना): बिहार के कद्यावर नेता और राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का आज 72 बरस के हो गए हैं। अपने बेबाक अंदाज को लेकर सुखिर्यों में रहने वाले लालू प्रसाद यादव इस बार अपने जन्मदिन पर भी खामोश रहने पर मजबूर है। वजह है लालू प्रसाद की बीमारी और चारा घोटाला! लालू प्रसाद यादव बहुचर्चित चारा घोटाले के चार मामलों में सजायाफ्ता है। गंभीर बिमारियों से जूझ रहे लालू प्रसाद यादव इस समय रांची के रिम्स अस्पताल में भर्ती है। इस वजह से लालू प्रसाद यादव ने अपना जन्मदिन हाॅस्पिटल में ही मनाया। राजद की ओर से दिल्ली स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजन किया गया पर बिहार में रौनक दिखाई नहीं दी...

 

रांची पहुंची लालू टीम, काटा केक, दी बधाईयां

बिहार के एक बड़े जनसमूह के लोकप्रिय नेता लालू प्रसाद यादव के जन्मदिन पर राज्य में पसरा यह सूनापन राजद के लोगों को कचोट रहा है। बिहार में उत्सव की तरह मनाए जाने वाला उनका जन्मदिन रांची में ही सादगी से मनाया जा रहा है। लालू प्रसाद यादव के समर्थक व पार्टी कार्यकर्ता रांची पहुंच गए। कार्यकर्ताओं की ओर से रिम्स के बाहर ही केक काटा गया और एक दूसरे को बधाई दी। आइए इस मौके पर जानते है बिहार के लाल 'लालू प्रसाद यादव' से जुड़ी रोचक बातें:—

 

लालू प्रसाद यादव बेशक राजनीति में शिखर पर पहुंचे पर उनके जीवन की वास्तविकताएं रोमांचित कर देने वाली हैं। लालू यादव का जीवन अभावों और गरीबी के बीच से गुजरते हुए यहां तक पहुंचा है।

 

लालू की शैतानी बनी पटना की राह

 

गोपालगंज के फुलवरिया गांव में जन्मे लालू यादव का परिवार बेहद गरीबी से गुजरा है। अपनी किताब 'गोपालगंज टू रायसिना' में लालू ने अपने दिनों को बखूबी याद किया है। उन्होंने लिखा कि स्कूल में नाम लिखाया गया तब वह बेहद शरारती हुआ करते थे। गरीबी ऐसी कि स्कूल में फीस देने के लिए भी पैसे नहीं होते थे। इसलिए हर शनिवार को वह स्कूल में रस्सी पगहा और चावल दिया करते। शरारत करते एक बार हींग बेचने वाले का झोला उन्होंने कूएं में फेंक डाला। मां से खूब डांट पड़ी। मां ने बड़े भाई महेंद्र चौधरी के साथ पटना भेज दिया। तब लालू यादव भाई के साथ मेहनत मजदूरी करने लगे।


करने पड़े कई काम

 

पटना के शेखपुरा मध्य विद्यालय में उनका नामांकन करा दिया गया। स्कूल में वह एनसीसी कैडेट बने तो पहली बार जूते और ड्रेस मिले। इससे पूर्व उन्होंने जूते नहीं पहने थे। तब लालू अपने भाई के साथ वेटेनरी कॉलेज के एक शौचालय विहीन कमरे में रहते थे। किरासन के पैसे नहीं होने से वह लालटेन तक नहीं जला पाते। घर में शाम से ही अंधेरा छाया रहता। गरीबी से लड़ते हुए उन्होंने होटल में भी काम किए और रिक्शे चलाए।

 

अपनी अदाकरी को लेकर लड़कियों में बने चर्चित

लालू यादव के पास तब गरम कपड़े तक नहीं थे। सर्दियों में वह पुआल में लिपटकर रात गुजारते। वह पटना यूनिवर्सिटी में पहुंचे तो रोज नहा पाने के लिए भी कपड़े नहीं होते। लड़कियां उन्हें लालू महात्मा कहती थीं। लोगों की नकल उतारने में माहिर लालू कॉलेज में लड़कियों के बीच अधिक लोकप्रिय हुए। वह उनकी खूब मदद किया करते थे।

जेपी आंदोलन ने दिया लालटेन वाला नेता, फैली मौत की अफवाह


लालू यादव पढ़ लिखकर डॉक्टर बनना चाहते थे। लेकिन एक दोस्त ने बताया कि इसके लिए बायोलॉजी पढ़नी होगी। मेढ़क की चीर फाड़ कर पढा़ई करनी होगी। लालू को यह रास नहीं आया।उन्होंने फिर एल.एल.बी की डिग्री ली। वह छात्र राजनीति में सक्रिय हुए और विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गए। बाद में वह जेपी आंदोलन में सक्रिय हुए आंदोलन जब हिंसक हुआ तो वह छात्र संघर्ष समिति के नेता के बतौर सड़कों पर उतरे। पुलिस ने उनकी खूब पिटाई की। यह अफवाह भी फैला दी गई कि पुलिस की पिटाई से लालू की मौत हो गई। आपातकाल में वह जेल भी गए। जेपी आंदोलन के बाद 1977 के आम चुनाव में वह पहली बार सांसद बने। बाद में 1980-85 में वह विधायक बने। बाद में 1990 में वह मुख्यमंत्री बने।