newsdog Facebook

जन्मदिवस: रामप्रसाद बिस्मिल,जिनके नाम में भी था दो धर्मों का मेल..

Mykhabar 2019-06-12 03:29:09

भारत में बिस्मिल को क्रांतिकारी, शायर, लेखक, इतिहासकार, अनुवादक , साहित्यकार के रूप में उनका नाम बड़े सम्मान से लिया जाता है। उनका जन्म 11 जून यानि आज के ही दिन 1897 को उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में हुआ था।

उनके नाम में दो धर्मों का मेल था। उनके पिता रामभक्त थे, जिसके कारण उनका नाम र से रामप्रसाद रख दिया गया। बिस्मिल उनका उपनाम था, जो कि उर्दू भाषा का शब्द है, जिसका मतलब है आत्मिक रूप से आहत। उन्होंने अपने नाम की ही तरह हिन्दू-मुस्लिम एकता पर काफी काम भी किए और काफी लिखा भी।

“कौन जाने ये तमन्ना इश्क की मंजिल में है।

जो तमन्ना दिल से निकली फिर जो देखा दिल में है।।”

बिस्मिल अशफ़ाक जिगर मुरादाबादी की इस शेर सुनकर मुस्करा दिये तो अशफ़ाक ने पूछ ही लिया- “क्यों राम भाई! मैंने मिसरा कुछ गलत कह दिया क्या?”

इस पर बिस्मिल ने जबाब दिया- “नहीं मेरे कृष्ण कन्हैया! यह बात नहीं। मैं जिगर साहब की बहुत इज्जत करता हूँ मगर उन्होंने मिर्ज़ा गालिब की पुरानी जमीन पर घिसा पिटा शेर कहकर कौन-सा बड़ा तीर मार लिया। कोई नयी रंगत देते तो मैं भी इरशाद कहता।”

अशफ़ाक को बिस्मिल की यह बात जंची नहीं उन्होंने चुटनौती भरे लहजे में कहा- “तो राम भाई! अब आप ही इसमें गिरह लगाइये, मैं मान जाऊँगा आपकी सोच जिगर और मिर्ज़ा गालिब से भी परले दर्जे की है।”

उसी वक्त पंडित राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ ने यह शेर कहा-

“सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है।

देखना है जोर कितना बाजु-कातिल में है?”

और इसी गीत को गाते हुए कई क्रां’तिकारी वीर हंसते-हंसते फां’सी पर चढ़ गए।

अपने जीवन के अंतिम दिनों में गोरखपुर जेल में उन्होंने अपनी आत्मकथा लिखी। फांसी के तीन दिन पहले उन्होंने स्वयं लिखा है- ‘आज 16 दिसम्बर, 1927 ई. को निम्नलिखित पंक्तियों का उल्लेख कर रहा हूं, जबकि 19 दिसंबर, 1927 ई. सोमवार (पौष कृष्ण 11 संवत 1984) को साढ़े छ: बजे प्रात: काल इस शरीर को फांसी पर लटका देने की तिथि निश्चित हो चुकी है। अतएव नियत सीमा पर इहलीला संवरण करनी होगी।’  ‘जय हिन्द’
  • About
  • Latest Posts