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दो दिन बाद बिजली उत्पादन हो जाएगा बंद, शहर में छा जाएगा अंधेरा, पढि़ए पूरी खबर...

Patrika 2019-07-11 20:29:29

कोरबा. बारिश का असर कोयला उत्पादन (Coal production) पर पड़ रहा है। खनन में आई कमी से बिजली घरों को कोयला की आपूर्ति सामान्य से कम हो रही है। इससे संयंत्रों में कोयला (Coal) का भंडारण कम है। सेंट्रल एनर्जी ऑथोरिटी के अनुसार सीपत संयंत्र में मात्र दो दिन का कोयला स्टॉक बचा है।

कोयले की कमी से सीपत सहित प्रदेश के अन्य बिजली घर भी जूझ रहे हैं। बिलासपुर स्थित सीपत संयंत्र को प्रतिदिन लगभग 44 हजार टन कोयले की जरूरत है। संयंत्र को कोयले की आपूर्ति दीपका प्रोजेक्ट से की जाती है। 24 घंटे में औसत 14 बार रेल लाइन से कोयला भेजा जाता है।

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बारिश के कारण खदान से कोयला उत्पादन (Coal production) में भी कमी आइ है। औसत 12 रैक कोयला (Coal) सीपत प्लांट को रेल मार्ग से भेजा जा रहा है। स्टॉक तक कोयला (Coal) पहुंचने में कमी और उठाव अधिक होने से स्टॉक में भी कोयले की कमी पडऩे लगी है। सीपत संयंत्र में दो दिन का स्टॉक है। जबकि 15 दिन का कोयला स्टॉक (Coal Stock) होना जरूरी है।

एनटीपीसी की कोरबा के जमनीपाली स्थित यूनिट भी कोयला (Coal) की संकट से जूझ रही है। संयंत्र में एक दिन का कोयला बचा है। रोज होने वाली आपूर्ति पर बिजली का उत्पादन निर्भर है। हालांकि यह स्थिति कई दिन से बनी हुई है। यूनिट से 2600 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है।

डीएसपीएम में भी कमी
छत्तीसगढ़ बिजली कंपनी की कोरबा स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद ताप विद्युतगृह में भी कोयले का भंडारण कम है। संयंत्र में दो दिन तक के लिए उत्पादन बचा है।

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