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इस गांव में रावण का दहन नहीं वध किया जाता है, वो भी इस अनोखे अंदाज में, पहले रामलला लेते हैं जन्म, फिर....

Patrika 2019-10-10 17:37:05

बोरगांव/जुगानीकलार. सार्वजनिक दशहरा उत्सव समिति के द्वारा ग्राम पंचायत हिर्री एवं भू भूमका में 6 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक रामलीला कार्यक्रम का मंचन हुआ। जिसमें प्रथम दिवस रामजन्म द्वितीय दिवस सीता हरण, बाली सुग्रीव युद्ध व दशहरा के मुख्य आकर्षण को राम रावण का युद्ध, संध्याकालीन सीता अग्नि परीक्षा के पश्चात लव कुश कंडिका मंचन किया गया तथा आज आखिरी मंचन कर रावण का वध किया गया।

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रावण का वध किया जाता है
भूमका में भी रहा दशहरा की धूम: उसी तरह ग्राम पंचायत भूमका के मूर्तिकार मोहन सिंह कुंवर, ग्राम के वरिष्ठ वीरेंद्र चनाप, देव सिंह निषाद, बैजनाथ तिवारी, सतीश कुंवर, नारायण कुंवर, अध्यक्ष भैसाखु मंडावी, रामभरोस कुंवर का कहना था कि हमारे पुर्वजों के अनुसार यह परंपरा सर्व प्रथम भूमका से 1947-48 के दशक से शुरू हुआ जो आज तक निरंतर चलते हुए रावण का वध किया जाता है और उसके नाभि से निकला हुए अमृत को लोगों के द्वारा तिलक के रूप में अपने माथे पर लगाया जाता है और धन ऐश्वर्य के प्रतिक माने जाने वाले रैनी पत्ता को साथ घर ले जाते हैं।

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मिट्टी से बना रावण का होता है वध
कार्यक्रम के सुत्राधार एवं पूर्वजों से रावण मुर्ती के निर्माता हिर्री के रामचंद्र राना एवं भूमका के रूपसिंह निषाद और मोहन सिंह कुंवर के कहे अनुसार यहां पर रावण का दहन नहीं होता यहां मिट्टी के बने रावण का वध होता है रामलीला के पश्चात श्रीराम जी द्वारा रावण के नाभी मे तीर मारकर उनका वध किया जाता है और रावण के नाभी में अमृत भण्डार से जो अमृत का श्राव होता है उसका तिलक लगाने ग्रामीण जन उमड़ पड़ते है। ऐसी मान्यता है कि अगर कोई तिलक लगता है तो उसे शारीरिक मानसिक व आर्थिक रूप से स्वास्थ्य लाभ होता है।

कार्यक्रम में रामलीला समिति के अध्यक्ष भारद्वाज बैद्य, मंडली अध्यक्ष सोमचंद यादव, सरपंच धनंजय नेताम, उपसरपंच शांति बैद्य, रमेश पांडे, हितेश साहू, फूलसिंह बैद्य, तरसिंह बैद्य, उत्तम भारद्वाज, रामसिंह नेताम व कनस बैद्य व पंचगण सहित चारों समाज के ग्राम वासियों का महत्वपूर्ण योगदान रहता है।