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आपसी परवाह की कमी से कम समय में सफलता पाने की कोशिश में होते मानसिक रोग

HINDUSTAN KHABAR 2019-10-10 17:34:40

आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं से साफ़ ज़ाहिर है कि समाज में आपसी परवाह की कमी है.कम समय में सफलता पाने की चाहत बढ़ रही है.सबसे बड़ी व अहम वजह है कि मानसिक स्वास्थ्य बेहद निर्बल हो गया है. निराशा को बढ़ाने वाले कारणबढ़े हैं. आज वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे है. इस मौके पर मन की सेहत, हताशा के कारणों व कैसे खुद की मदद करें, बता रहे हैं

  1. आत्महत्या का विचार क्यों आता है, यह एक बेहद जटिल प्रश्न है. लेकिन अगर इंसान के दशा पर परवाह भरी नजर डाली जाए, तो कुछ अंदाज़ा लगाया जा सकता है. जिन स्थितियों पर ख़ास नजर रखनी चाहिए, उनमें से चंद हैं -

    • वित्तीय समस्याएं (नौकरी चली जाना, कारोबार में नुकसान, किसी से मिला वित्तीय धोखा, यानी वे स्थितियां जिनसे वित्तीय स्थिति बहुत बेकार होने का अंदेशा हो, जॉब न मिल पाना भी उलझनें बढ़ाता है).
    • रिश्तों में उलझन (खासतौर पर दाम्पत्य ज़िंदगी की उलझनें).
    • अकेलापन (जीवनसाथी के असमय निधन, अंतर्मुखी व्यक्तित्व, किसी प्रिय के चले जाने से मिली उदासी भी इसमें शामिल है).
    • मानसिक कठिनाई (किसी कारण से कोई मनोरोग).
    • दु:साध्य बीमारी (लम्बे समय तक चलने वाला कोई रोग).
    • परिवर्तन (जीवन में आकस्मित आया ऐसा बदलाव जिसके साथ तालमेल न बैठा पा रहे हों) निगेटिव विचार (ख़ासतौर पर ख़ुद को लेकर जैसे कि ‘मेरी जिंदगी में कोई उम्मीद बाकीनहीं है’).
    • असफलताएं (दफ़्तर में पिछड़ने, किसी व की तरक्की हो जाने या ख़ुद को नकारा समझने जैसी हीनता).
    • सताया जाना (स्कूल-कॉलेज या कार्यस्थल पर किसी के द्वारा सताए या परेशान किए जाने से होने वाली मानसिक परेशानी).
    • मानसिक या शारीरिक प्रताड़ना, नशे की लत.
  2. अकेलापनया निराश महसूस करना, वार्ता में बार-बार निराशा जाहीर करना, जीवित रहने के लिए कोई उम्मीद व उद्देश्य न होना याव्यक्तिगत नुक़सान के लिए विकल्प मन में आना या सोचना जैसे लक्षण मेंटल हेल्थ को हो रहे नुकसान की ओर संकेत करते हैं. इसके अलावानींद न आना, कम भोजन खाना या भूख कम होना, अप्रत्याशित रूप से शरीर का वज़न बढ़ना या घटना, नशीली दवाओं व शराब के प्रति रुचि दिखाना, दूसरों के साथ सामाजिक सम्पर्क जैसे वार्ता या मिलना-जुलना कम करना, बहुत भावुक हो जाना या भावनाओं के प्रति पूरी तरह से विरक्त होना, बदला लेने के लिए क्रोध जैसे लक्षण बताते हैं कि विशेषज्ञ से सलाह लेने की आवश्यकता है.

  3. यदि आपको शक है कि कोई आदमी जिसे आप जानते हैं वह हताशा या निराशा से गुज़र रहा है, तो बात करने से गुरेज न करें. यह भ्रम है कि जो जान देने की बात करता है, वो हँसी कर रहा होता है या अगम्भीर चर्चा करता है. होने कि सम्भावना है कि वो मदद तलाश रहा हो. वहीं यह भी भ्रम है कि आत्महत्या का कोई ज़िक्र करे, तो तुरंत विषय बदल देना चाहिए क्योंकि जितना वह सोचेगा, उतना कोशिश करने को प्रवृत्त होगा. हर सूरत में इस मामले पर बात करें व मदद करने की पहल करें. ध्यान रखिए, अकेलेपन, निराशा या अवसाद से जूझते इंसान के लिए बात करना बचाव का रास्ता बना सकता है.