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सेक्स रैकेट की सरगना सोनू पंजाबन को कोर्ट ने सुनाई 24 साल की सजा

Bebak News 2020-07-24 16:14:56

New Delhi: राजधानी दिल्ली सहित देश के तमाम बड़े राज्यों की सेक्स रैकेट सरगना कुख्यात गीता अरोड़ा उर्फ सोनू पंजाबन को द्वारका कोर्ट ने 24 साल की कैद की सजा सुनाई है। जबकि उसके सहयोगी संदीप को 20 साल की सजा का ऐलान किया गया है। इसके साथ ही कोर्ट ने सोनू पर 7 लाख का जुर्माना भी किया है।

दिल्ली की गीता सलोनी में रहने वाली महज 20 साल की गीता का साल 2000 के बाद सोनू पंजाबन बनने का सफर शुरू हुआ। सोनू पर एक नाबालिग लड़की को जबरन देह व्यापार में धकेलने का दोष सिद्ध हुआ, जिसके बाद सोनू पंजाबन को ये सजा मिली है। वहीं, उसके साथी संदीप को नाबालिग के साथ रेप करने और उसे देह व्यापार में जबरन धकेलने के आरोप में सजा सुनाई गई है।

इससे पहले दिल्ली की द्वारका कोर्ट ने हाल ही में सोनू पंजाबन और संदीप को दोषी करार दिया था। दोषी करार दिए जाने के 2 दिन बाद तिहाड़ जेल में बंद सोनू पंजाबन ने मेडिसिन खाकर आत्महत्या का ड्रामा भी किया था।

एक नाबालिग को अगवा कर जबरन वेश्यावृति के धंधे में धकेलने के आरोप में सोनू को दोषी ठहराया था, जिसके बाद सोनू ने जेल में नींद की गोलियां खा ली। लेकिन ये कोई पहला मौका नहीं है, जब सोनू ने इस तरह ड्रामा रचा। इससे पहले भी वो कई बार पुलिस पर दबाव बनाने के लिए ऐसे कदम उठाने की धमकी देती रही है।

इस तरह दिल्ली की गीता बन गई सोनू पंजाबन

पैसे और दबंगई के नशे ने भोली भाली सोनू को पहले नशे की गिरफ्त में धकेला और उसके बाद जुर्म की दुनिया से उसका चोली दामन का साथ जुड़ गया और ये साथ ऐसा रहा कि जिसने सोनू को उसके बाद वापस अपने परिवार की दुनिया में नहीं लौटने दिया। पावर के नशे में सोनू ने एक से एक खौंफनाक कदम उठाये, जिन्हें उठाने में कई बार पेशेवर अपराधी भी पीछे हट जाते हैं।

सूत्रों की माने तो सोनू पंजाबन ने उसी से शादी की जो जुर्म की दुनिया में रम चुका था। पहले उन्हीं दबंगों के बल पर उसने अपना कारोबार खड़ा किया और बाद में उन सबकी मुखबिरी कर उन्हें अपने रास्ते से भी हटवा दिया। लेकिन ऐसे एक भी आरोप उसपर आज तक साबित नहीं किए जा सके। बाहरी दिल्ली खासकर नजफगढ़ और हरियाण के आसपास दीपक सोनू और हेमंत सोनू जुर्म की दुनिया के बड़े नाम थे। उन पर अपहरण और फिरौती के कई मामले दर्ज थे। गीता अरोड़ा को समझ में आ गया था कि अगर आगे बढ़ना है तो ऐसे लोगों छत्रछाया उसे वो मुकाम हासिल करवा सकती है।

2003 में वो सोनू ब्रदर्स की शरण में आई और दीपक सोनू से शादी कर ली। लेकिन यह शादी बहुत दिन नहीं चल पाई। 2004 में दीपक पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। इसके बाद गीता ने उसके छोटे भाई हेमंत सोनू का दामन थाम लिया। हेमंत सोनू से गीता अरोड़ा सबसे ज्यादा प्रभावित रही थी साल 2006 में हुए हेमंत के एनकाउंटर के बाद अपना नाम सोनू रख लिया और पंजाबन उसके आगे जोड़ दिया। इस तरह दिल्ली की गीता बन गयी सोनू पंजाबन।

सोनू पंजाबन के भोले-भाले चेहरे के पीछे एक बेहद शातिर दिमाग काम करता है। वो प्यार करना भी जानती है, धमकाना उसकी फितरत में है तो उसकी आवाज़ में दहशत भी है। उसे किसी से डर नहीं लगता। अपनी 20 साल से ज्यादा की अपराध की दुनिया में वो कभी पुलिस के सामने गिड़गिड़ाई नहीं। बल्कि नखरे नाटक कर पुलिसवालों के नाक में दम कर दिया। फिलहाल अभी उसे केवल 2 मामले में सजा मिली है। जबकि गुनाहों की अभी लंबी फेहरिस्त है, जिसकी सजा मिलनी बाकी है।

सोनू पंजाबन के पिता चलाते थे ऑटो रिक्शा

गीता अरोड़ा के पिता रोजगार की तलाश में रोहतक से दिल्ली आए थे। वह यहां ऑटो रिक्शा चलाते थे। गीता ने 10वीं पास करने के बाद ब्यूटी पार्लर खोल लिया। 18 साल की उम्र में उसकी पहली शादी हुई, वो भी एक हिस्ट्रीशीटर से। विजय सिंह जिसके संबंध यूपी के बदमाश श्री प्रकाश शुक्ला से बताए जाते थे। लेकिन 2003 में यूपी STF ने उसके पति को मार गिराया। गीता को पैसों की किल्लत होने लगी। ब्यूटी पॉर्लर की कमाई से न घर चल रहा था, न महात्वाकांक्षाएं पूरी हो रही थीं। परिस्थितियां ऐसी बदलीं कि वह कॉलगर्ल बन गई। विजय सिंह के साथ की वजह से उसे पावर की अहमियत पता चल चुका था। जिसके बाद उसने सोनू ब्रदर्स का रुख किया।

इनकी मौत होने के बाद सोनू ने अपनी कॉल गर्ल्स कंपनी की शुरुआत की। जिसका नेटवर्क न केवल दिल्ली में था बल्कि हर बड़े शहर, पर्यटन स्थल हर जगह थी। सोनू की इस बदनाम कंपनी की पर पुलिस लगातार नजर रख रही थी।

आखिरकार, अप्रैल 2011 में सोनू को 4 लड़कियों और 4 लड़कों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया। इस बार उस पर मकोका (महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट 1999) लगाया गया। जिससे वो जल्दी बाहर ना आ सके। लेकिन अदालत में पुलिस आरोप साबित नहीं कर पाई और सोनू पंजाबन मकोका से बरी हो गई।

साल 2017 में सोनू पर एक केंद्रीय मंत्री को ब्लैकमेल करने का भी आरोप लगा। सोनू तिहाड़ जेल की सलाखों के पीछे रही है लेकिन कोई न कोई जुगत भिड़ाकर वो हमेशा जेल से बाहर आ गयी। लेकिन इस बाद उसे अदालत ने लंबी कैद में भेजा है।

टीम बेबाक