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लौरिया में होगा चुनावी घमासान, लालटेन की रौशनी बिखेर सकती है उजाला

Swatantra Prabhat 2020-10-12 22:18:55
प्रमुख-साहब-व-बाबा-के-नाम-से-जिला-में-मशहूर-लौरिया-प्रखंड-के-प्रमुख-शम्भू -तिवारी-को-राजद-का-टिकट-लेकर-आने-पर-शहर-में-कार्यकर्ताओं-ने-जगह-जगह-पर-उन्हें-फूल-माला-पहनाकर-उनका-भव्य-स्वागत-किया।


प्रमुख साहब व बाबा के नाम से जिला में मशहूर लौरिया प्रखंड के प्रमुख शम्भू तिवारी को राजद का टिकट लेकर आने पर शहर में कार्यकर्ताओं ने जगह-जगह पर उन्हें फूल – माला पहनाकर उनका भव्य स्वागत किया।

साथ ही लालू, राबड़ी, तेजस्वी यादव आदि के पक्ष में गगनचुंबी नारे लगाते रहे। इधर लौरिया – योगापट्टी विधानसभा क्षेत्र से सैकड़ों कार्यकर्ता अपने राजद प्रत्याशी बाबा से मिलने व शुभकामनाएं देने पहुंचे थे।


राजद प्रत्याशी शम्भू तिवारी ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि मैं शुरू से सभी धर्मों के लोगों को एकसाथ एकसूत्र में पिरोकर चलता हूँ। कुछ अपरिपक्व लोग जाति की राजनीति करते हैं। जिन्हें कभी सफलता प्राप्त नहीं होगी।

मैं हमेशा से दबे, कुचले, असहायों, जरूरतमंदों की मदद करता रहा हूँ और करता रहूंगा। कौन क्या कहता है , उसपर ध्यान देने की जरूरत नहीं है। आप सब राजद को जिताने में अपनी महती भूमिका निभाएं।

मौके पर राजद के युवा जिलाध्यक्ष मुकेश यादव, अमन उर्फ विशाल मिश्रा, शम्भू यादव, मुकेश पटेल, सुभाष पांडेय, अंसारुल्लाह अंसारी, असरुल्लाह, कृष्णा मोदरवाल, शत्रुघ्न राव, विधायक चौधरी सहित कई लोग उपस्थित थे।

हालांकि, तीन टर्म से नीतीश शासन से जनता उकताहट में भी दिख रही है, गौरतलब है कि जनता पर जादू कर लगातार जीत का सेहरा बांधनेवाले सत्ताधारी पक्ष का गुमान भरा टिकट का बैलून अबकी बार पश्चिम चम्पारण के कुल 9 सीटों में से यदि चार से पांच सीटों पर पार्टीबेस के चहेते लोगों की उम्मीदवारी मिलने से भी पंचर हो जाये तो आश्चर्य की बात नहीं।

“स्वतंत्र प्रभात” के आकलन के तत्कालिक रूझानों में पश्चिम चम्पारण की क्रमश: लौरिया, बगहा और वाल्मीकिनगर सीटों पर अबकी बार राजग गठबंधन को औंधेमुँह गिरना पड सकता है।

लोगों में नाराजगी इसबात की भी देखी जा रही है कि, सत्ता के मद में आज का राजनीतिक दल अपने प्रतीक को हीं जनमत का आधार मान चुका है, शीर्ष के नेताओं का मुखौटा लगा जब स्थानीय प्रतिनिधि जीतते रहे तो क्या वजूद जनता को अपने प्रतिनिधियों को चूनने की।

अनुमान के मुताबिक लौरिया का गरीब और महरूम तबका हीं नहीं कुछ विशेष सामाजिक लोग भी अबकी बार लालटेन की रौशनी में अपने खो रहे समाजवाद के अस्तित्व ढूँढने की जुगत करते दिख रहे है।

लोगों का कहना है, कि अफसरशाही की धधक चुकी भट्ठी से अब लोगों को निजात दिलाने का समय है। वरना जंगल राज का दंश झेल चुके चम्पारण को अफसर राज के घुप्प अंधेरे में जिन्दगी जीने की मजबूरी बन सकती है, जो लोकतंत्र को आहत करनेवाला वाक्या है।