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पार्टी की स्थिति सुधारने को सोनिया गांधी ने बनाए तीन पैनल, गुलाम नबी आजाद सहित असंतुष्ट नेताओं को भी किया शामिल

Jansatta 2020-11-21 09:10:09
कांग्रेस में हर स्तर पर बदलाव की मांग के साथ चिट्ठी लिखने वाले नेताओं को पैनल में शामिल किया गया है।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शुक्रवार को पार्टी के उच्च नेताओं को शामिल कर तीन पैनलों का गठन किया है। बताया गया है कि यह कदम आर्थिक, विदेश और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मामलों पर पार्टी की स्थिति स्पष्ट रखने के लिए उठाया गया है। इन पैनलों में एक-दो लोगों को छोड़ दिया जाए, तो ज्यादातर पुराने नेता ही शामिल हैं। इनमें पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से लेकर राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद और कई अन्य पूर्व केंद्रीय मंत्री भी शामिल हैं।

बताया गया है कि इन तीन पैनलों में गुलाम नबी आजाद के साथ, पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा, एम वीरप्पा मोइली और शशि थरूर जैसे नेता भी शामिल हैं, जिन्होंने पार्टी में हर स्तर पर बदलाव की मांग के साथ अगस्त में सोनिया गांधी को पत्र लिखा था। अब इन पैनल्स में पुराने नेताओं को शामिल करना इसी बात का इशारा है कि गंभीर नीतिगत मुद्दों पर फैसले के लिए सोनिया गांधी अब भी उन पर भरोसा करती हैं।

बता दें कि कांग्रेस में इन पैनल्स का गठन ऐसे समय में किया गया है, जब RCEP समझौते से भारत के अलग रहने के मुद्दे पर पार्टी से अलग-अलग आवाजें उठी थीं। यहां तक कि अनुच्छेद 370 को दोबारा लागू कराने पर भी कांग्रेस नेताओं के अलग-अलग सुर रहे हैं। अब पार्टी के काम करने के तरीकों पर सवाल उठाने वाले नेताओं को पैनल में शामिल कर के सोनिया गांधी ने इशारा कर दिया है कि उनके मन में किसी भी सदस्य के लिए गुस्सा नहीं है। उनकी यह कोशिश पार्टी में बिहार चुनाव और उपचुनाव के नतीजों के बाद उभरे विवादों को भी शांत करने के तौर पर भी देखी जा रही है।

हालांकि, दूसरी तरफ जिन नेताओं ने पार्टी में नीतिगत बदलाव करने के लिए सोनिया गांधी को पत्र लिखा था, उनमें से कई पैनल गठन के कदम से कुछ खास खुश नहीं बताए जा रहे हैं। पैनल में शामिल किए गए एक नेता ने बताया कि यह कदम उत्साहित करने से ज्यादा मन बहलाने वाला है, क्योंकि जो मुद्दे उठाए गए थे, उन्हें अब तक गंभीरता से नहीं लिया गया और पार्टी लगातार ढलान की ओर है।

एक अन्य नेता ने कहा, “संस्थागत मामलों को उठाने के बजाय हमें नीतिगत मुद्दों को देखने के लिए कहा जाता है, पार्टी के पास पहले ही कई फोरम हैं, जो इन मुद्दों पर कांग्रेस अध्यक्ष को जानकारी देते हैं और पैनल में पूर्व प्रधानमंत्री को शामिल करना पूर्व में उनके द्वारा लिए गए पद को छोटा दिखाने जैसा है।”