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दिल्ली में कोरोना के हालात ठीक होते होते कैसे बिगड़ गए, जानिए एक्सपर्ट्स का क्या है कहना

News India Live 2020-11-21 12:14:17


दिल्ली में कोरोना संक्रमण के हर दिन नए केस बढ़ रहे हैं. राजधानी दिल्ली में पांच लाख से ज्यादा लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके है. वहीं 8159 लोगों की संक्रमण से मौत हुई है. हाल ही में नीति आयोग और स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस बारे में दिल्ली को आगाह किया था कि त्यौहार और ठंड की वजह से आने वाले दिनों में मामले तेजी से बढ़ सकते है. हर दिन करीब 15 हजार केस आने की संभावना है. स्वास्थ्य मंत्रालय का ये डर सच हो रहा है.

 


दिल्ली में अभी कुल 5,17, 238 लोग इस वायरस से संक्रमित हो चुके हैं और 8,159 लोग की मौत हुई है. वहीं अब कुल 40,936 एक्टिव केस है जिनका इलाज चल रहा है. अभी पॉजिटिविटी रेट 9.05% है और मृत्यु दर 1.58% है. इतनी संख्या में केस तब भी सामने नहीं आए थे जब देश में कोरोना के केस हर जगह बढ़ रहे थे. जानकारों की माने तो राजधानी दिल्ली में कोरोना के बढ़ते मामलों के पीछे चार प्रमुख कारण है – प्रदूषण, ठंड, त्यौहार, मास्क ना पहना और शारीरिक दूरी का पालन नहीं करना है. डॉक्टरों की माने तो दिल्ली में हालत ठीक हो रहे थे लेकिन पिछले एक महीने में सब गड़बड़ हो गई.

 

नीचे दिए गए इन चार कारणों की वजह से दिल्ली में केस बढ़ने लगे और हालत ये हो गए कि अस्पतालों में बेड की कमी होने लगी…

  • सबसे पहले बात करते है प्रदूषण की. दिल्ली में हर दिन एयर क्वालिटी इंडेक्स खराब होता जा रही था. प्रदूषण और कोरोना दोनों एक साथ घातक हो सकते हैं.
  • इसी दौरान त्यौहारों की शुरुआत हो गई. डॉक्टरों की माने तो त्यौहारों के दौरान लोगों ने घूमना शुरू कर दिया. इस दौरान न तो सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखा गया, न ही मास्क लगाया. नवरात्र, दशहरा, करवा चौथ, दिवाली और छठ के दौरान लोग बाजारों में खरीदारी करते दिखे.
  • प्रदूषण और त्योहारों के अलावा कोरोना के मामले बढ़ने की सबसे बड़ी वजह है लोगों का मास्क न पहनना और शारीरिक दूरी ना बनाए रखना.
  • चौथी बड़ी वजह है ठंड, जब बाकी फ्लू भी तेजी से फैलते है.

इन चारों वजहों ने दिल्ली में कोरोना के केस में बढ़ोतरी कर दी. मैक्स हॉस्पिटल के डॉ विवेक नांगिया और एम्स के पूर्व निदेशक डॉ एम सी मिश्रा के मुताबिक दिल्ली में केस बढ़ने के ये चार कारण प्रमुख है.

 

एक्सपर्ट्स की राय
मैक्स हॉस्पिटल के डॉ विवेक नांगिया ने कहा, “पिछले कुछ दिनों में कोरोना के मरीजों की तादाद एक दम से जोर पकड़ गई है, अस्पतालों में भीड़ इकट्ठा हो गई है, बेड मिलना मुश्किल हो गया है. इसके कई कारण है सबसे पहला वायु प्रदूषण, दिवाली के दौरान लोगों ने बाहर घूमना फिरना शुरू कर दिया, लोगों ने मास्क पहनना कम कर दिया. जो ट्रेंड हमें देखने को मिल रहा है यह बिल्कुल ठीक नहीं है क्योंकि इस वायरस को कोल्ड वायरस कहते हैं, यह सर्दियों के वक्त और बढ़ता है. तो अगर हमने सावधानी नहीं बरती तो यह और बढ़ना शुरू हो जाएगा.”

 


एम्स दिल्ली के पूर्व निदेशक डॉ एम सी मिश्रा ने कहा, “गणेश चतुर्थी, नवरात्रि, दुर्गा पूजा, करवा चौथ, दिवाली पर लोगों ने कोरोना को गंभीरता से नहीं लिया. साथ ही पब्लिक ट्रांसपोर्ट की शुरुआत हो गई, मेट्रो चलने लगी, बस फुल कैपेसिटी में चलने लगी, बाजार सारे खुल गए और लोगों ने समझा कि अब सब कुछ ठीक है, कोरोना खत्म हो गया. जो लोग सावधानियां बरत रहे थे, उन्होंने भी ध्यान नहीं दिया. बाजारों में भीड़ दिखने लगी, मेट्रो में भीड़ दिखने लगी और ऊपर से मास्क ना लगाना और लगाना भी तो ठीक तरीके से नहीं, शारीरिक दूरी का भी ख्याल नहीं है. तो यह इंफेक्शन फैलेगा और यह इन्फेक्शन इतना खतरनाक है कि एक व्यक्ति कई व्यक्तियों को संक्रमित कर सकता है.”

 

इनके आलवा सार्वजनिक जगहों पर बिल्कुल एहतियात नहीं बरता जा रहा था. डॉक्टरों के मुताबिक, इस बीच प्रदूषण ने संक्रमण में और इजाफा किया. जिसने आग में घी को काम किया.

 



एम्स दिल्ली के पूर्व निदेशक डॉ एम सी मिश्रा ने कहा, “इंफेक्शन पार्टियों में, बस में सफर करने के दौरान, मेट्रो में सफर करने के दौरान, वर्कप्लेस पर, बाजारों में भीड़ और इस दौरान मास्क ना पहनने पर इंफेक्शन का खतरा होता है. दिल्ली में प्रदूषण बहुत ज्यादा बढ़ गया, एयर क्वालिटी इंडेक्स हजार तक पहुंच गया. यह डबल मार है जिसे हम कहते हैं दोहरी मार है प्रदूषण और कोरोना वायरस की. लोग अगर सतर्क नहीं रहे तो इसमें नुकसान लोगों का ही है.”


 

दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार दिल्ली में बढ़ते मामलों को रोकने के लिए कई कदम उठा रही है. जिसमें अस्पतालों में खासकर आईसीयू और वेंटिलेटर बेड बढ़ाए जा रहे है, टेस्टिंग कैपेसिटी बढ़ाना, डोर टू डोर सर्विलांस, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग, मास्क ना पहने पर चालान, शादियों में लोगों की संख्या सीमित करना जैसे कदम उठाए है. डाक्टरों के मुताबिक केस तभी काबू में आएंगे जब लोग सावधानी बरतेंगे. हर जगह मास्क पहना होगा, शारीरिक दूरी, ठंड से सावधानी और भीड़भाड़ से बचना होगा. जब जरूरत हो तभी निकालना है और कोई भी लक्षण हो तो तुरंत जांच कराएं.

 

मैक्स हॉस्पिटल के डॉ विवेक नांगिया ने कहा, “इसके लिए बहुत जरूरी है कि घर से बाहर तभी निकले जब बहुत ज्यादा जरूरी हो. जब भी घर से बाहर निकले तो मास्क जरूर पहने, मास्क आपको कोरोना और प्रदूषण इन दोनों से बचाएगा. साथी हाथों की सफाई बनाए रखें और लोगों में दूरी भी रखें.”