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व्यापार में सरलीकरण की सुविधा प्रदान करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध - परसादी लाल मीणा

Khas Khabar 2021-01-12 00:00:00

जयपुर। सरकार ईओडीबी की सुविधा (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) उपलब्ध कराने और उद्योगों को प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद करने को लेकर प्रतिबद्ध है। हम ओपन एक्सेस को किफायती बनाने पर विचार करेंगे। राज्य सरकार ने सिंगल विंडो सिस्टम स्थापित किया है जिसमें 14 विभाग के अधिकारी उद्योगों से संबंधित 100 विभिन्न क्षेत्रों में अनुमति प्रदान कर रहे हैं। विभिन्न कार्यालयों के चक्कर लगाने के बजाय एमएसएमई राज पोर्टल के माध्यम से आसानी से स्वीकृति प्राप्त कर सकते हैं। 2019-2020 के दौरान, रीको को ई-ऑक्शन के माध्यम से औद्योगिक भूखंडों की नीलामी से 1400 करोड़ रुपये का निवेश प्राप्त हुआ है।

राजस्थान सरकार के उद्योग मंत्री परसादी लाल मीणा ने यह जानकारी दी। वे मुख्य अतिथि के रूप में मंगलवार को 'उद्योगों को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने में चुनौतियां' विषय पर आयोजित वेबिनार में संबोधित कर रहे थे। वेबिनार का आयोजन फिक्की राजस्थान स्टेट काउंसिल द्वारा इंडियन एनर्जी एक्सचेंज लिमिटेड के सहयोग से किया गया।

राजस्थान उर्जा विकास निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक रोहित गुप्ता ने कहा कि बिजली की लागत उद्योगों की समग्र लागत का एक प्रमुख निवेश है। बिजली की लागत उद्योगों की संपूर्ण लागत में एक प्रमुख इनपुट है। बिजली डिस्कॉम की वित्तीय स्थिति के कारण अन्य राज्यों की तुलना में राजस्थान में बिजली की लागत अधिक है, जो कि राज्य के कनज्यूमर मिक्स से जुड़ा हुआ है। विभाग संपूर्ण खरीद लागत को कम करने के लिए छूट का उपयोग, जनरेटर को समय पर भुगतान करना, थर्मल प्लांटों की परिचालन दक्षता, आदि जैसे क्षेत्रों पर गौर करने की योजना बना रहा है

बिजनेस डवलेपमेंट एंड एसवीपी, इंडियन एनर्जी एक्सचेंज के हेड रोहित बजाज ने कहा कि राजस्थान में ओपन एक्सेस के लिए अत्यधिक क्रॉस सब्सिडी सरचार्ज, 24-घंटे शिड्यूलिंग प्रतिबंध, न्यूनतम 8 घंटे की यूनिफॉर्म शिड्यूलिंग, ओपन एक्सेस का लाभ उठाने के लिए न्यूनतम 1 मेगावाट अनुबंध की मांग जैसे अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। उद्योग 7 से अधिक वर्षों के लिए दीर्घकालिक, मध्यम अवधि 1 वर्ष से 5 वर्ष तक, 1 वर्ष तक के लिए अल्पावधि जैसे बिजली खरीद के विकल्पों का लाभ उठा सकते हैं। हालांकि, सबसे पसंदीदा विकल्प पावर एक्सचेंज है जो अत्यधिक लिक्विड और पारदर्शी बाजार है।

पार्टनर, डेलॉयट, अनुजेश द्विवेदी ने कहा कि ओपन एक्सेस सस्ती बिजली खरीदने का एक विकल्प है। यह उपभोक्ताओं को बिजली जनरेटर, ट्रेडर्स अथवा एक्सचेंज से सीधे बिजली खरीदने की सुविधा देता है। राजस्थान में, ओपन एक्सेस से उत्पन्न होने वाले रोजगार के अतिरिक्त अवसरों और जीडीपी में वृद्धि से राज्य के रेवेन्यू पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। राज्य विभाग, राजस्थान विद्युत नियामक आयोग (आरईआरसी), पावर डिस्कॉम के बीच इस बात पर विचार-विमर्श शुरू कराने की आवश्यकता है कि ओपन एक्सेस को प्रभावी ढंग से कैसे लागू किया जा सकता है। इसके अलावा, राजस्थान औद्योगिक विकास नीति 2019 के तहत ओपन एक्सेस से संबंधित प्रावधानों को लागू करने के लिए एक रोड मैप स्थापित करने की भी आवश्यकता है।

इससे पहले, स्वागत भाषण देते हुए, चेयरमैन, फिक्की राजस्थान स्टेट काउंसिल एवं सीएमडी, कजारिया सिरेमिक्स लिमिटेड अशोक कजारिया ने कहा कि कोविड के बाद औद्योगिक गतिविधि फिर से शुरू होने के साथ ही मंदी से लड़ने और राज्य में नए निवेश आकर्षित करने की आवश्यकता है।
इसके लिए, ऑपरेटिंग लागत में कमी, विशेष रूप से बिजली की लागत को कम करने से उद्योगों के विकास में मदद मिल सकती है। राजस्थान अन्य राज्यों द्वारा अपनाई जा रही सर्वोत्तम नीतियों को देख सकता है। वेबिनार के दौरान चेयरमैन, फिक्की राजस्थान सब-कमेटी ऑन एमएसएसई, एनके जैन ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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