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मामला कोरोना के प्रायवेट टेस्ट का....लोगों ने बनाया व्यवस्था का मजाक

Sanjeevni Today 2021-01-13 21:24:45

शहर में कोरोना का आरटी-पीसीआर टेस्ट 1400 से 1500 रुपए प्रति व्यक्ति के मान से हो रहा है। इसके पिछे का कारण बताया जा रहा है कि इस शुल्क में पीपीई कीट का शुल्क भी शामिल है।


शहर में कोरोना का आरटी-पीसीआर टेस्ट 1400 से 1500 रुपए प्रति व्यक्ति के मान से हो रहा है। इसके पिछे का कारण बताया जा रहा है कि इस शुल्क में  पीपीई कीट का शुल्क भी शामिल है। कारण जानने पर जो बातें सामने आ रही है,वे हास्यास्पद  हैंं। क्‍योंकि शहर के रसूखदार घरों के बाशिंदे कोरोना से बचना भी चाहते हैं, टेस्ट भी करवाना चाहते हैं लेकिन अपने पड़ोसी को कानो-कान खबर न हो, इस शर्त को भी पूरी करवाना चाहते हैं। हालांकि इस सबके परिणाम संबंधित व्यक्ति को ही भुगतना पड़ रहे हैंं। वह रूपयों से भी पिटा रहा है और घर में वायरस के फैलाव को रोकने की जगह अनजाने में उसे बढ़ावा दे रहा है।


शहर में कोरोना की आरटी-पीसीआर जांच प्रायवेट पैथालॉजी केंद्रों पर हो रही है। वहां के सूत्रों का दावा है कि जब जांच के पूछताछ हेतु फोन आता है तो सबसे पहले पूछा जाता है कि कितने रुपये लगेंगे? इसके बाद पूछा जाता है कि हमारे घर पर पीपीई कीट पहनकर तो नहीं आओगे? ऐसा होने पर हमारी सामाजिक बदनामी हो जाएगी। जब बताया जाता है कि इसका हल क्या है? तो कहा जाता है कि आप हमारे घर पर पीपीई कीट लेकर आना, वहीं पहनना,सेम्पल लेना और वहीं उतारकर वापस ले जाना। इसके चलते पीपीई कीट की राशि भी जोड़ दी जाती है।


पैथालॉजी केंद्र के एक कर्मचारी के अनुसार नये शहर के एक परिवार में जब  एक जांच का सेम्पल लेने गए तो शर्त अनुसार पीपीई कीट वहीं पहनी और बाद में वहीं उतारकर पॉलीथिन में रखी। इस दौरान कथित असावधानी होना ही थी। इसका परिणाम यह रहा कि जिसका सेम्पल लिया गया था,वह पॉजीटिव आया । परिवार के सदस्य तो सतर्कता रखे हुए थे लेकिन संबंधित का चौकीदार और माली कोरोना पॉजीटिव हो गए। कारण यह रहा कि सेम्पल लेनेवाले ने जहां कीट पहनी और बदली,वह चौकीदार का कमरा था। उसी कमरे में माली भी बैठकर गप्पे लड़ाता था। कार का ड्रायवर इसलिए बच गया क्योंकि वह उस कमरे में नहीं आता-जाता था।