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मिलिए इस नन्हे ‘मानव सर्प’ से, सांपों की तरह छोड़ता रहता है अपनी खाल .

CricHindiNews 2021-02-22 00:00:00


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ऐसा आपने देखा या सुना होगा कि सांप अपनी खाल (केंचुल) छोड़ता जो उसकी परत होती है. परंतु ओडिशा में एक बच्चा है जिसे लोग ‘मानव सर्प’ कह रहे हैं. क्योंकि इस बच्चे की त्वचा भी लगभग हर महीने निकल जाती है. हालाँकि यह एक दुर्लभ बीमारी है जो करीब 6 लाख में से किसी एक को हो जाती है. इस बच्चे की यह कहानी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई है. चलिए बताते हैं इस बीमारी और बच्चे के बारे में…



आपको बता दें कि 10 साल के इस बच्चे का नाम जगन्नाथ है. जगन्नाथ ओडिशा के गंजम जिले में अपने माता-पिता के साथ रहता है. इसकी त्वचा पर मोटे-मोटे गहरे रंग के चकत्ते निकलते हैं. ये चकत्ते हर महीने निकल जाते हैं. उनकी जगह फिर नए चकत्ते निकल जाते हैं. बता दें कि इस बीमारी का नाम लैमलर इचियोसिस है. यह एक लाइलाज बीमारी है. वहीं स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट को माने तो इस बीमारी से ग्रसित जगन्नाथ हर घंटे नहाता रहता है. ताकि उसके शरीर से नमी कम न हो सके. नमी कम होते ही उसकी त्वचा निकलने लग जाती है. इस से उसे काफी दर्द होता है.



दरअसल जगन्नाथ के शरीर की त्वचा अब इतनी कठोर हो चुकी है कि उसे चलने-फिरने में भी दिक्कत आ रही है. अगर उसे अपने हाथ-पैर सीधे करने होते हैं तो उसे किसी की मदद लेनी पड़ जाती है. जगन्नाथ के पिता प्रभाकर प्रधान चावल के खेतों में मजदूरी करते हैं. प्रभाकर इतना नहीं कमाते कि बच्चे का इलाज करवा पाए. हालाँकि जगन्नाथ को यह बीमारी बचपन से ही हो रखी है. यह बीमारी 6 लाख लोगों में से किसी एक को हो जाती है. यह बीमारी जीन्स में आई खराबी के कारण से होती है. इससे आदमी के शरीर की त्वचा बेहद धीमी गति से खुद को बना पाती है.



गौरतलब है कि इसलिए जब त्वचा पूरी तरह से रूखी और वैसी हो जाती है जैसे मछलियों और सांपों की त्वचा हो जाती है. लैमलर इचियोसिस में त्वचा के ऊपर एक पतली परत बनती है जिसे कोलोडियोन मेंब्रेन कहा जाता हैं. यह धीमे-धीमे कड़ी होती जाती है और चकत्तों का रूप लेकर उतरती है. हालाँकि कोलोडियोन मेंब्रेन कुछ हफ्तों में उतर जाती है. लेकिन इसमें बहुत दर्द होता है. इस पीड़ित इंसान को जीवन भर इसी के साथ रहना पड़ता है. उसे हर दिन दर्द सहना पड़ता है. जगन्नाथ की आंखों पर भी कोलोडियोन मेंब्रेन बनी हुई है. वह इतनी कड़ी है कि सोते समय वह अपनी पलकें भी बंद नहीं कर पाता.



वहीं लैमलर इचियोसिस बीमारी दुनिया भर के कई देशों में पाई जाती है. यह एक जन्मजात बीमारी होती है जिसका कोई इलाज नहीं है. जीन्स की खराबी के कारण से होने वाली इस बीमारी के कई स्तर होते हैं. इसका पता बच्चे के पैदा होते ही चल जाता है. अगर उसके असली त्वचा के ऊपर एक और त्वचा की एक और परत दिखाई पड़े तो समझ लीजिए वह लैमलर इचियोसिस बीमारी से पीड़ित है.