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कभी न लौटे तबाही: अब क्या करेगा 136 लोगों का परिवार, सरकार की ये बड़ी तैयारी

Newstrack Hindi 2021-02-23 02:05:00

फोटो-सोशल मीडिया

7 फरवरी रविवार के दिन उत्तराखंड के चमोली में आई भीषण तबाही का कहर अभी भी बरकरार है। विनाशकारी बाढ़ का शिकार बने लोगों को अभी तक कोई अता-पता नहीं चला है। जिसके चलते अब राज्य सरकार ने आपदा के बाद लापता हुए 136 से अधिक लोगों को मृत घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस बारे में सोमवार को एक अधिसूचना जारी की गई। रेस्क्यू ऑपरेशन में लापता लोगों को लेकर ये अधिसूचना जारी की गई है।


प्रावधानों को लागू करने का निर्णय

ऐसे में तबाही का कहर हुए लोगों के बारे में अधिकारियों ने बताया कि आमतौर पर जो लोग आपदा में लापता हो जाते हैं, उनका अगर सात साल तक कुछ पता नहीं चलता तब उन्हें मृत घोषित किया जाता है।

आगे बताते हुए लेकिन चमोली आपदा के मामले में, बर्थ ऐंड डेथ्स ऐक्ट, 1969 के पंजीकरण के प्रावधानों को लागू करने का निर्णय लिया गया है। इस ऐक्ट के तहत आपदा में लापता लोगों को सात साल के पहले मृत घोषित किया जा सकता है।

फोटो-सोशल मीडिया

4 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा

इस पर अधिकारियों ने कहा कि यह कदम प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए शुरू की गई है। राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों के लिए 4 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की है जबकि केंद्र द्वारा 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की गई है। 2013 केदारनाथ त्रासदी के मामले में, जो लोग लापता थे, उन्हें सात साल की अवधि से पहले ही मृत घोषित कर दिया गया था।

सूत्रों से सामने आई जानकारी में बताया गया कि राज्य के स्वास्थ्य सचिव अमित नेगी ने सभी जिला मजिस्ट्रेटों को इस प्रक्रिया के बारे में लिखा है। उन्होंने लिखा है कि आपदा में लापता हुए व्यक्तियों के परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों को मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करते समय इस प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।