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Judge Surinder Singh Nijjar और उनकी विरासत

Gyan Hi Gyan 2021-04-07 17:32:36

C. Raj Kumar.पिछले हफ्ते भारत के लिए एक दुखद क्षण आया था, जब हमारे देश के एक प्रतिष्ठित न्यायविद और सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश माननीय श्री सुरिंदर सिंह निज्जर का निधन हो गया था। वह एक असाधारण न्यायाधीश थे, और अत्यंत तेजस्वी, बुद्धिमान, निश्छल और निष्ठावान व्यक्ति थे। वह हमेशा शांत चित्त रहते थे और विभिन्न उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालय की खंडपीठ की अध्यक्षता करते हुए जिस नैतिक मूल्यों और न्यायायिक प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया उसके लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। न्यायमूर्ति निज्जर अपने अत्यधिक विनम्र स्वभाव और कानून और न्याय के जटिल मुद्दों को विनम्र तरीकों से निबटाने में अद्वितीय थे।

सुकरात ने एक अच्छे न्यायाधीश के आवश्यक गुणों का उचित रूप से इस प्रकार वर्णन किया था, “किसी न्यायाधीश में चार चीजें होती हैं, विनम्रतापूर्वक सुनना, बुद्धिमानी से जवाब देना, गंभीरता से विचार करना, और निष्पक्ष रूप से निर्णय लेना। न्यायाधीश निज्जर के संपर्क में आने वाले वकील और न्यायाधीश निस्संदेह रूप से इस बात से सहमत होंगे कि वे न्यायाधीश के इन गुणों के प्रतीक थे जिनके बारे में सुकरात ने 2,400 से अधिक साल पहले उल्लेख किया था।

न्यायमूर्ति निज्जर के जीवन और विरासत के कई पहलू हैं जिनका उल्लेख किया जाना चाहिए। लेकिन मेरे विचार में जो सबसे ज्यादा श्रेष्ठ हैं, वे निम्नलिखित पांच पहलू हैं

1. उत्कृष्ट शैक्षणिक योग्यता

2. मजबूत कानूनी कौशल के साथ विश्लेषणात्मक दिमाग

3. उच्चतम न्याय और आचरण का प्रतिनिधितव करने वाले सख्शियत

4. विनम्रता की गहरी भावना और अत्यधिक विनम्र स्वभाव

5. स्पष्ट निष्पक्षता और व्यावसायिक ईमानदारी

1949 में जन्मे, न्यायाधीश निज्जर ने एक ऐसा जीवन जीया जो उनकी अकादमिक गतिविधियों और ऐतिहासिक निर्णयों में उत्कृष्टता के संयोजन का प्रतिनिधित्व करता है, जिसने कानून और विवाद समाधान के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में न्यायशास्त्र के विकास में योगदान दिया। उन्होंने लंदन विश्वविद्यालय से कानून में स्नातक किया, इसके बाद मिडल टेम्पल इन, लंदन में बार-एट-लॉ की पढ़ाई पूरी की, जहां बाद में उनके शानदार करियर के रूप में उन्हें मिडल टेम्पल के माननीय सोसायटी में बेंच (बेंचर) के मास्टर के रूप में चुना गया।

इंग्लैंड में कुछ समय काम करने के बाद, उन्होंने भारत की भूमि के लिए अपना नेतृत्व देने का फैसला किया। ऐसे समय में जब वह ब्रिटेन में रहने और काम करने का फैसला कर सकते थे, जब उनके पास इसका विकल्प था, तो न्यायमूर्ति निज्जर ने भारत लौटने का फैसला किया। भारत के न्यायशास्त्र के विकास में उनका योगदान वाणिज्यिक कानून, संवैधानिक कानून और मध्यस्थ कानून में अनुकूलन में उत्कृष्टता को बढ़ावा देता है। यह उनकी यात्रा में परिलक्षित होता है जो सत्तर के दशक के अंत में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में एक वकील के रूप में शुरू हुआ था। उन्होंने चंडीगढ़ में जिला न्यायालयों, डिपार्टमेंटल अथारिटियों, केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण में भी योगदान दिया।

पंजाब सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता के रूप में अपने संक्षिप्त कार्यकाल के बाद, उन्होंने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में खंडपीठ में अपनी सेवा दी। इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट में न्यायाधीश के रूप में उनकी नियुक्ति हुई। 2006 में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय, चंडीगढ़ के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनके संक्षिप्त कार्यकाल के दौरान उनके योगदान के बाद, 2007 में, न्यायमूर्ति निज्जर कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बन गये, और 2000 के पहले दशक के अंत में वह भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश बन गए।

उनके शानदार करियर को कई ऐतिहासिक निर्णयों के लिए याद किया जाता है, जिनके कारण कानून को नए सिरे से समझने की आवश्यकता को बल मिला है। उन्होंने वाणिज्यिक विवादों के समाधान के लिए वैकल्पिक विवाद समाधान का उपयोग करने की वकालत की। उनके ²ष्टिकोण ने भारत में प्रभावी ढंग से न्याय प्रदान करने को सक्षम बनाया है। भारत एल्युमीनियम बनाम कैसर एल्युमिनियम जजमेंट (बाल्को) एक ऐसा ही मामला था, जिसमें भाटिया इंटरनेशनल और वेंचर ग्लोबल के मामलों से संबंधित कानूनों को भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा खारिज कर दिया गया था। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड एंड ओर्स बनाम यूनियन ऑफ इंडिया, इनरकन इंडिया बनाम इनरकन जीएमबीएच, स्विस टाइमिंग लिमिटेड बनाम कॉमनवेल्थ गेम्स और महाराष्ट्र राज्य बनाम भारतीय होटल और रेस्तरां एसोसिएशन ऐसे कई अन्य मामलों में से हैं, जिन्हें आज दुनिया भर में जाना जाता है। इन मामलों ने न केवल भारत के कानूनों को फिर से परिभाषित करने में मदद की है, बल्कि भारतीय न्यायपालिका को कानून के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नए न्यायशास्त्र बनाने में भी सक्षम बनाया है।

न्यायमूर्ति निज्जर ने न केवल भारत में कानून के नियम बनाने के लिए एक प्रभावशाली प्रभाव पैदा किया, बल्कि वे अपने दूरदर्शी निर्णयों के लिए भी प्रसिद्ध थे। उनकी अनुपम कानूनी अस्मिता का विस्तार कई अन्य भूमिकाओं तक भी किया गया, जिसमें प्रमुख हैं – भारत के सर्वोच्च न्यायालय के मध्यस्थता और सुलह परियोजना समिति के अध्यक्ष, इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड के गैर-कार्यकारी निदेशक, इंडियाबुल्स रियल एस्टेट लिमिटेड के स्वतंत्र निदेशक, पंजाब राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष,और एडवाइजरी / एनएसए पंजाब बोर्ड के अध्यक्ष। उन्होंने विश्वविद्यालयों, सरकारी निगमों और राष्ट्रीयकृत बैंकों के लिए स्थायी वकील के रूप में भी काम किया।

भारतीय न्यायपालिका में उनकी लंबी यात्रा कई प्रकार की भूमिकाओं और मामलों का प्रतिनिधित्व करती है, जिनमें उन्होंने अपना नेतृत्व किया। उनके निर्णयों और योगदानों ने उन्हें भारत और विश्व स्तर पर सबसे उत्कृष्ट कानूनी विशेषज्ञों में से एक बना दिया है। आज, हमें न्यायमूर्ति निज्जर की नयी खोजों और दूर²ष्टि को अमल में लाना चाहिए, जिसने आज न्याय के कई पहलुओं, खासकर भारत में वैकल्पिक विवाद समाधान को देखने के तरीके को बदल दिया है। न्याय की दुनिया में उनके योगदान से परे, न्यायमूर्ति निज्जर ने न्यायिक संवादों के लिए सर्वोच्चता, शिष्टाचार, शालीनता और परिष्कार की भावना लाई। न्यायमूर्ति ब्रॉनसन के शब्दों में न्यायमूर्ति निज्जर को हमेशा एक उत्कृष्ट न्यायविद और खूबसूरती से परिकल्पित एक अद्भुत सज्जन के रूप में याद किया जाएगा, ‘एक न्यायाधीश को इतना बुद्धिमतापूर्ण होना चाहिए ताकि वह यह समझ सके कि उससे चूक हो सकती है और इसलिए, कभी भी सीखने के लिए तैयार रहना चाहिए, अपने सभी विचारों को त्यागने के लिए महान और ईमानदार होना चाहिए, और जहां भी वह नेतृत्व कर सकता है सत्य का पालन करना चाहिए, और अपनी त्रुटियों को साहसपूर्वक स्वीकार करने में सक्षम होना चाहिए।’

(प्रोफेसर (डॉ.) सी राज कुमार एक विधि प्राध्यापक और विद्वान हैं जो हरियाणा के सोनीपत के जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के संस्थापक कुलपति हैं।)

न्श्रयू स्त्रोत आईएएनएस