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फिर लॉकडाउन का डर, दिल्ली और पुणे से बड़ी संख्या में अपने घरों को लौट रहे प्रवासी मजदूर

Punjab Kesari 2021-04-08 12:35:04

कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों ने एक बार फिर से लोगों की चिंता बढ़ा दी है। लोगों के मन में डर है कि कहीं एक साल पहले जैसे हालात न हो जाएं। कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच कई राज्यों ने अपने स्तर पर नाइट कर्फ्यू और लॉकडाउन लगाना शुरू कर दिया है। लोगों को डर है कि अगर पूरे देश में लॉकडाउन लगा तो पिछले साल की तरह वे फिर फंस सकते हैं। सबसे ज्यादा चिंता प्रवासी मजदूरों को सता रही है।


नेशनल डेस्क: कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों ने एक बार फिर से लोगों की चिंता बढ़ा दी है। लोगों के मन में डर है कि कहीं एक साल पहले जैसे हालात न हो जाएं। कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच कई राज्यों ने अपने स्तर पर नाइट कर्फ्यू और लॉकडाउन लगाना शुरू कर दिया है। लोगों को डर है कि अगर पूरे देश में लॉकडाउन लगा तो पिछले साल की तरह वे फिर फंस सकते हैं। सबसे ज्यादा चिंता प्रवासी मजदूरों को सता रही है।

 

कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच फिर से प्रवासी मज़दूरों के अपने घरों को वापिस लौटने की खबरें सामने आ रही हैं। राज्यों में जैसे कोरोना को लेकर सख्ती बरती जा रही है उससे लॉकडाउन की आहट समझा जा रहा है। दिल्ली और पुणे से कई प्रवासी मजदूरों को वापिस लौटते हुए दिखाई दे रहे हैं। 

 

लॉकडाउन लगा तो कहां जाएंगे?
दिल्ली के आनंद विहार टर्मिनल पर बीते दिन बड़ी संख्या में प्रवासी मज़दूर घर जाते हुए दिखे तो वहीं पुणे से भी मजदूर अपने गांव को लौट रहे हैं। मजदूरों का कहना है कि पिछले साल की तरह अचानक लॉकडाउन लग गया तो हम लोग कहां जाएंगे, हम फिर से फंस जाएंगे। पिछले साल काफीं दिक्कते हुई थीं इसलिए हम लोग पहले ही अपने घरों को वापिस जा रहे हैं। हम पिछले साल की तरह यहां नहीं फंसना चाहते। रेलवे स्टेशनों पर पिरवासी मजदूरी की बढ़ती भीड़ को देखते हुए स्टेशन के कर्मचारी सोशल डिस्टेसिंग समेत अन्य कोरोना नियमों का ध्यान रख रहे हैं। बता दें कि दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, पंजाब और उत्तर प्रदेश जैसे कई राज्यों ने अपने शहरों में नाइट कर्फ्यू लगाया है। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश में तो वीकेंड लॉकडाउन भी लगाया गया है। 

 

जब पैदल ही निकल पड़े थे मजदूर
साल 2020 में मार्च में जब लॉकडाउन लगा तो बसें, ट्रेनें और फ्लाइटें सबकुछ बंद हो गया था। लॉकडाउन में सबसे ज्यादा दिक्कतें प्रवासी मजदूरों को आई थीं क्योंकि वे अपने घरों से दूर थे। ऐसे में कई प्रवासी मजदूर पैदल ही अपने घरों और गांवों की तरफ निकल पड़े थे।